Public Program

Public Program 1995-10-11

Location
Talk duration
62'
Category
Public Program
Spoken Language
English, Hindi, Marathi

Current language: Hindi, list all talks in: Hindi

The post is also available in: English.

11 अक्टूबर 1995

Public Program

Vancouver (Canada)

Talk Language: English | Translation (English to Hindi) - Draft

कृपया बैठ जाएं। यह बेहतर रहेगा। अगर आप के लिए कोई स्थान नहीं हैं, आप यहां आगे आ सकते हैं।

सभी सत्य के साधकों को हमारा प्रणाम!

बिल्कुल आरंभ में, हमें समझना होगा कि सत्य जो है वो है। आप उसे बदल नहीं सकते। आप उसे परिवर्तित नहीं कर सकते, और अगर मैं आप के लिए उसका वर्णन भी करूं, आप उसे प्राप्त नहीं कर सकते।

आप को सत्य आप के केंद्रीय तंत्रिका तंत्र पर अनुभव करना होगा। वह केवल हमारे उत्थान से ही प्राप्त किया जा सकता है, एक नई चेतना में महत्वपूर्ण खोज के माध्यम से। इस मानवीय चेतना में, हम सत्य का अनुभव नहीं कर सकते।

जैसे की आप जानते हैं, संस्कृत भाषा में शब्द है 'बोध’। ‘बोध’ का अर्थ है आत्म साक्षात्कार। और ‘बोध’ शब्द से ‘बुद्ध’ शब्द आया है, वो जो की आत्म साक्षात्कार प्राप्त, जाग्रत है, परंतु वास्तव में 'बोध’ का अर्थ है अपने केंद्रीय तंत्रिका तंत्र पर अनुभव करना। हमने अपने उत्क्रांति में जो कुछ भी हासिल किया है, जो कुछ भी, उसे हम अपने केंद्रीय तंत्रिका तंत्र पर महसूस कर सकते हैं।

उदाहरण के लिए, एक जानवर के लिए यह आवश्यक नहीं है, कि वह बहुत साफ-सुथरी सड़क से गुजरे। वह किसी भी स्थान से गुजर सकता है, लेकिन एक इंसान के लिए उसमें स्वच्छता की भावना विकसित हो गई है। ऐसी कई चीज़ें हैं, जो हमने जानवरों से कहीं ज़्यादा हासिल की हैं। तो हम सभी को बहुत पूर्ण, परिपूर्ण, संतुष्ट होना चाहिए लेकिन हम नहीं हैं। कारण क्या है? क्योंकि अभी भी हमें, हम जो हैं, उस से थोड़ा ऊपर उठना है।

अब मैं जो कुछ भी आपको बताने जा रही हूं, मैं आपसे अनुरोध करूंगी, कि उसे यूंही न स्वीकार कर लें, क्योंकि यह मैंने या किसी और ने बताया है। इस अंध विश्वास से काफी परेशानी हो चुकी है। तो बात सिर्फ इतनी है, कि अगर बात बन जाए, जो मैं कहती हूं वह सिद्ध हो जाए, तो आप इसे मान लेना, क्योंकि यह आपके अपने हित के लिए है, आपके परिवार के हित के लिए है, आपके समाज के हित के लिए है, आपके देश के हित के लिए है, और पूरे विश्व के हित के लिए है।

मैं जिस बारे में बात कर रही हूं, वह मनुष्य के वैश्विक परिवर्तन के बारे में है। उसके बिना कुछ भी हासिल नहीं किया जा सकता, जो पूरे समाज के लिए वास्तविक मददगार हो।

तो पहला सत्य यह है, कि आप यह शरीर, यह मन, ये भावनाएँ, यह बुद्धि, यह अहंकार और आपके संस्कार नहीं हैं, बल्कि आप शुद्ध आत्मा हैं। आप शुद्ध आत्मा हैं। आप को आत्मा बनना होगा। एक बार जब आप आत्मा बन जाते हैं, जब आप उस आत्मत्व को प्राप्त कर लेते हैं। तभी आपको पता चलेगा, कि वास्तविकता क्या है। उससे पहले यह सब एक मानसिक प्रक्षेपण है। मन सभी दिशाओं में बहता है, और तब आप पाते हैं, कि यह एक रेखीय तरीके से आगे बढ़ रहा है। यह एक बिंदु तक जाता है, और फिर वापस गिरता है, और आपके पास वापस आता है, 'बूमरैंग्स’ हमें कहना चाहिए। यही कारण है कि हमारे सभी उद्यम, हमारे सभी अनुसंधान, सब कुछ हमारे पास वापस आ जाते हैं, और हम आश्चर्यचकित हो जाते हैं कि यह कैसे हुआ।

यहां मैं अब आपसे विज्ञान के बारे में बात कर रही हूं। विज्ञान की अपनी सीमाएँ हैं। यह शिक्षाप्रद भी है। जब लोगों ने परमाणु के बारे में बात करना शुरू किया, तो उन्हें नहीं पता था कि इससे परमाणु बम या हाइड्रोजन बम बनेगा, लेकिन अंततः वे बने, जो आज हमें नष्ट करने के लिए जिम्मेदार है।

जब हम शांति की बात करते हैं, तो हमें यह एहसास नहीं होता कि शांति तभी संभव है, जब मनुष्य शांतिपूर्ण हो जाये। हम कुछ संगठनों से, या कुछ कृत्रिम तरीकों के माध्यम से, या दूसरों पर बमबारी करके शांति स्थापित नहीं कर सकते। ऐसा नहीं होगा। यह स्रोत है, जिस पर हमें जाना चाहिए। यह लोगों का दिमाग है, जहां से हिंसा शुरू होती है। मैं ऐसे कई लोगों से मिली हूं, जिन्हें शांति के लिए पुरस्कार मिला है, लेकिन वे इतने गर्म स्वभाव के हैं, कि अगर आपको उनसे मिलना है, तो बेहतर होगा कि आप बीच में एक डंडा रखें। मुझे नहीं पता, कि उन्हें ये पुरस्कार कैसे मिले। इसे समझना वाकई मुश्किल है।

इसलिए आप को यह समझना होगा, कि हिंसा का स्रोत आप ही हैं, आपके भीतर ही हैं। यह आपके दिमाग में शुरू होती है, और फिर सामूहिक रूप से बढ़ती है, और फिर पूरा देश हिंसक हो सकता है। अब आप हर तरह की हिंसा का सामना कर रहे हैं। व्यक्तिगत हिंसा, सामाजिक हिंसा, धार्मिक हिंसा, इत्यादि, क्योंकि हम शांतिपूर्ण नहीं हैं।

अब हम शांतिपूर्ण कैसे बनें? एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात है, जो हमें समझनी चाहिए। जैसा कि मैं कहती हूं, आपको बताया गया होगा (श्री माताजी अपनी दाईं ओर किसी से बात करती हैं, हिंदी में बोलती हैं- कुंडलिनी की कोई तस्वीर नहीं रखी है? और फिर सामने देखते हुए बोलती हैं) हाँ! मुझे खेद है! मैं आपको बताना चाहता हूं, कि हमारे भीतर एक शक्ति निहित है, जिसे 'कुंडलिनी' कहा जाता है। संस्कृत में ‘कोइल’ का अर्थ कुंडल है, और वह स्त्री प्रकृति की शक्ति है। वह आदिशक्ति माता का प्रतिबिम्ब है। अब आप कह सकते हैं, कि बाइबिल, कुरान या किसी भी अन्य जगह आदिशक्ति माँ का कोई वर्णन नहीं है। शायद नहीं रहा होगा! लेकिन यह शक्ति विद्यमान है, और हम इसे साबित कर सकते हैं, कि यह शक्ति हमारे भीतर इस कुंडलिनी के रूप में परिलक्षित होती है, जो शुद्ध इच्छा की शक्ति है। इस का अस्तित्व है!

अब, ऐसे कई लोग हैं जिन्होंने किताबें पर किताबें लिखी हैं, कि यह कुंडलिनी बहुत खतरनाक चीज है। ऐसा बिल्कुल नहीं है, क्योंकि यह आपकी माँ है। आपकी माँ जो आपको दूसरा जन्म देने के लिए उत्सुक है। जब आपका जन्म हुआ, तो किसने कष्ट सहा, आप ने या आप की मां ने? आपकी माँ ने आपके लिए कष्ट सहे।

उसी प्रकार यह कुण्डलिनी आपकी अपनी माँ है। वह आपके बारे में सब कुछ जानती हैं। वह आपके अतीत के बारे में जानती है, वह आपकी आकांक्षाओं के बारे में जानती है। वह आपके बारे में सब कुछ जानती है, और वह आपको दूसरा जन्म देने के लिए उत्सुक है। यह कुंडलिनी त्रिकोणीय हड्डी में स्थित है, जिसे 'सैक्रम' कहा जाता है, जिसका अर्थ है कि यूनानी जानते थे, कि यह एक पवित्र हड्डी है। उन्होंने इसे सैक्रम हड्डी क्यों कहा?

इस बार जब मैं यूक्रेन गई, तो मुझे पता चला, कि तीन हजार ईसा पूर्व वे आदिशक्ति में विश्वास करते थे। न केवल वे वहां मौजूद चक्रों पर विश्वास करते थे, बल्कि उन्होंने उन्हें चित्रित किया, इन चक्रों में मौजूद पंखुड़ियों की सटीक संख्या के साथ सुंदर चित्र बनाए। यह तीन हजार ईसा पूर्व की बात है, और वे आदिशक्ति को 'अदिति' कहते थे, जैसे हम भी संस्कृत में कहते थे।

तो यह समझना होगा, कि धर्मों में भी किसी न किसी तरह गुमराह करने की कोशिश की गई है। उदाहरण के लिए (ईसाई धर्म में) उन्होंने कभी आदिशक्ति माँ शब्द का उल्लेख नहीं किया। यह त्रित्व (ट्रिनिटी) यानि ईसा मसीह पुत्र, दूसरा पिता और तीसरी पवित्र आत्मा। आपके पास पिता और पुत्र हैं, और माँ के बारे में क्या? इस तरह लोगों ने मातृत्व, महिला को नीचा दिखाने की कोशिश की।

कुरान में भी ऐसा ही है। आप देखिए, मुश्किल यह है, कि मोहम्मद साहब ने कभी कुरान नहीं लिखी, न ही ईसा मसीह ने बाइबिल लिखी। यह उन लोगों द्वारा किया गया, जिन्होंने शायद कभी महिलाओं का सम्मान नहीं किया। खासकर कुरान मोहम्मद साहब की मृत्यु के चालीस साल बाद लिखी गई।

ईसा मसीह के साथ भी ऐसा ही। हम कह सकते हैं पॉल! पॉल वह सज्जन व्यक्ति है, जिन्होंने बाइबिल लिखी थी। मैं उन पर ज्यादा भरोसा नहीं करती (दर्शकों की प्रतिक्रियाएँ, हँसी और कुछ तालियाँ भी - श्री माताजी मुस्कुराती हैं और बात जारी रखती हैं) क्योंकि वह मिर्गी का रोगी था। वह मिर्गी का रोगी था। यही सबसे बड़ी समस्या है। यदि किसी को मिर्गी है, तो इसका मतलब है, कि वह व्यक्ति भूत बाधा ग्रस्त था। सहज योग में हम आपको यह साबित कर सकते हैं, कि वह बाधित था, और इस बाधित व्यक्ति ने लिखा, या मुझे कहना चाहिए, बाइबिल का संपादन किया, उन सभी के साथ संघर्ष किया। मैं नहीं जानती, पर ये कहा जाता है कि वह महिलाओं से घृणा करता था।।

इस प्रकार इन सभी धर्मों में महिलाओं की स्थिति इतनी असुरक्षित, बहुत असुरक्षित हो गई। मुझे लगता है, कि पश्चिम में महिलाएं बहुत असुरक्षित हैं। उन्हें पति को खुश रखना पड़ता है। उन्हें ऐसे ही कपड़े पहनने होंगे। ये सारे वर्णन जब मैंने पढ़े, तो मैंने कहा कि पतियों के बारे में इतनी चिंता क्यों? मैं समझ नहीं पा रही हूं। लेकिन अब मुझे मूल कारण पता चल गया है, कि यहां एक ऐसा समाज है, जहां महिलाओं को पुरुष को हमेशा खुश करने के लिए नाचना पड़ता है, और इस बात का ध्यान रखना पड़ता है, कि वह किसी अन्य महिला के साथ भाग न जाए।

यह कुछ ऐसा है, जो मुझे समझ में नहीं आता है, क्योंकि बाइबल में बहुत सारी सच्चाइयाँ हैं, और उनमें से एक है, (दाए शेल नॉट हैव एडल्टरस आईस'') तुम्हारी आंखें में भी अपवित्रता नहीं होनी चाहिए।'' उस सीमा तक, उस सूक्ष्म सीमा तक ईसा मसीह गए, और कहा कि तुम्हारी दृष्टि में कोई अपवित्रता नहीं होना चाहिए! अब आप बताइए, क्या आप को ऐसे लोग कहीं मिलते हैं? (दर्शकों की हंसी की आवाज)

तो, पूरी व्यवस्था कुछ बहुत ही गलत धारणाओं पर बनी थी, कि हमेशा महिलाओं पर संदेह करो, और पुरुषों पर संदेह करो, और पूरा संबंध किसी प्रकार के बड़े संदेह पर आधारित था।

मुसलमानों के बारे में जितना कम कहा जाए, उतना अच्छा है। उनका मानना ​​है, कि महिलाओं को धरती माता में आधा गाढ़ देना चाहिए, और पत्थरों से मार-मार कर हत्या कर देनी चाहिए। मेरा मतलब है, कल्पना करिए कितनी क्रूरता है! आधुनिक समय में भी वे ऐसा कर रहे हैं। इससे पता चलता है कि यह धर्म नहीं है! नहीं है! यह वह नहीं है, जो महिलाओं का सम्मान करता है। ये इंसानों को इंसान के रूप में सम्मान नहीं देता है।

किसी को भी किसी को मारने का अधिकार नहीं है। यदि आप एक छोटी सी चींटी भी पैदा नहीं कर सकते, तो आप किसी को क्यों मारें? लेकिन इस सिद्धांत को बिल्कुल नकारा जाता है, और वे सोचते हैं, कि उन्हें हत्या करने का पूरा अधिकार है, क्योंकि वे सोचते हैं, कि वे बहुत सम्मानित और नैतिक लोग हैं।

उसके लिए ईसा मसीह का जीवन इतना खुला है, कि जब मैरी मैग्डालिनी को पत्थरों से पीटा गया था, तो जरा कल्पना करें! वही बात! ईसा मसीह उन सभी लोगों के ख़िलाफ़ खड़े हुए, जो उसे पीटने, पत्थर फेंकने की कोशिश कर रहे थे। उनका मैरी मैग्डालिनी से कोई लेना-देना नहीं था। वह बहुत भिन्न थे। वे एक संत थे। वह कोई संत नहीं थी, लेकिन फिर भी उन्होंने कहा, ''जिसने कोई पाप नहीं किया है, वे ही उस पर पत्थर फेंक सकते हैं।'' ये समझने वाली बात है, कि वो महिलाओं का कितना सम्मान करते थे, कि उन्हें इस तरह पत्थर से नहीं मारना चाहिए।

लेकिन यह चल रहा है, आप देखिए, हर दिन। ये चीजें चल रही हैं, और फिर हम सोचते हैं, कि कोई भगवान नहीं है, क्योंकि जो लोग धर्म का दावा करते हैं, वे बहुत विचित्र हैं।

इंग्लैण्ड में एक पादरी था। मैं स्वयं एक ईसाई परिवार में पैदा हुई थी, और मुझे आश्चर्य होता था, कि कहाँ ईसा मसीह और कहाँ इसाई, क्योंकि (श्री माताजी थोड़ा हंसती हैं) एक मामला था। आजकल पादरियों के खिलाफ बहुत सारे मामले सामने आते हैं, लेकिन यह मामला बहुत अनोखा था, क्योंकि पुजारी को व्यभिचारी पाया गया। तो सब ने सवाल किया, “वह पादरी कैसे हो सकता है? तो पादरी ने कहा, “मैं क्या कर सकता हूँ? मेरे जीन (वंशाणु), सब ऐसे ही हैं! मैं क्या कर सकता हूँ? मैं खुद को रोक नहीं पाता !” तो, अब सारी जिम्मेदारी जीन (वंशाणु) के सिर, आप देखिए! लेकिन फिर भी मैं कहूंगी, अगर उसके जीन इतने खराब हैं तो उसे पुजारी क्यों बनना चाहिए? तो यदि आप किसी धर्म के प्रति इस प्रकार से देखते हैं, तो आपको लगने लगता है कि कोई भगवान नहीं है, कोई नैतिकता नहीं है। धार्मिक होने का कोई अर्थ नहीं है। यह बिल्कुल सत्य नहीं है, क्योंकि बिना यह जाने कि ईश्वर है या नहीं, यह कहना कि ईश्वर नहीं है, बहुत अवैज्ञानिक है! ऐसी स्थिति को स्वीकार करना बहुत अवैज्ञानिक है!

तो क्या यह जानने का कोई रास्ता है, कि ईश्वर है या नहीं? क्या यह जानने का कोई तरीका है, कि हम इस पृथ्वी पर क्यों हैं? यह सब बहुत महत्वपूर्ण है, और जिसके लिए हमारे निर्माता ने इस कुंडलिनी को त्रिकोणीय हड्डी में रखा है, जो आप सभी के पास है। आत्म साक्षात्कार प्राप्त करना आपका अपना अधिकार है। यह कुंडलिनी आपकी अपनी है, बिल्कुल बीज में मौजूद प्रीमियुल् की तरह! जब आप धरती माता में एक बीज डालते हैं, तो वह अपने आप सहज रूप से अंकुरित हो जाता है। उसी तरह, यह कुंडलिनी उठती है और आपके ब्रह्मरंध्र को भेदती है।

अब आपको पता होना चाहिए, कि मानव ऊर्जा सीमित है। इसे स्वीकार करना होगा। उस स्तिथि को स्वीकार करने में कुछ भी गलत नहीं है। इसलिए हमारे पास कुछ अतिरिक्त ऊर्जा होनी चाहिए। अब हम इसे कहाँ से प्राप्त कर सकते हैं? स्रोत कौन सा है? उदाहरण के लिए, धरती माता पौधों, फूलों, पेड़ों को ऊर्जा देती है। हमारे बारे में क्या? यदि हम स्वयं को धरती माता में समाहित कर लें, तो क्या हम उसमें से कोई ऊर्जा प्राप्त कर सकते हैं। नहीं, हम नहीं कर सकते।

लेकिन दूसरा सत्य यह है, कि प्रेम की एक सर्वव्यापी दिव्य शक्ति है, जो सभी जीवित कार्य करती है। उदाहरण के लिए, आप यहां सुंदर फूल देखते हैं, और उन्हें हल्के में ले लेते हैं, परंतु ये एक चमत्कार है। यह एक चमत्कार है, कि ये फूल अनायास ही अपनी अलग-अलग किस्मों में विकसित हो जाते हैं। वह कार्य कौन करता है? कौन बदलता है ये मौसम? जब मैं वैंकूवर आई, तो मैंने उन सज्जन से अनुरोध किया, "कृपया मुझे वैंकूवर के बगीचे में ले जाएं!" क्योंकि शरद ऋतु चालू है! कितनी सुंदर शरद ऋतु! यह बहुत आनंद देने वाली है! शरद ऋतु कौन बनाता है? कौन? वह कौन सी ऊर्जा है जो यह सब कार्य करती है?

तो मुझे आपको बताना होगा, कि एक ऊर्जा है जो सर्वव्यापी है, जो सभी जीवित कार्य कर रही है। यदि आप डॉक्टर से पूछें, ‘आप का हृदय कौन चलाता है?’ वह कहेगा, 'यह एक (ऑटोनोमस नर्वस सिस्टम) स्वायत्त तंत्रिका तंत्र है।' तो, आप उससे पूछें, “यह (ऑटो) 'स्वायत्त' कौन है?” अगर यदि कोई ऑटोमोबाइल है, तो कोई न कोई 'ऑटो’ तो होगा ही। अब आप नाम तो ऑटोनोमस देते हैं, लेकिन ये 'ऑटो’ कौन है? यह 'ऑटो’, हमें जानना होगा, कि यह हमारा स्व है, हमारी आत्मा है!

अब इसे जानने के लिए, हमें कुछ भी नहीं करना है। यह हमारे साथ जन्मा है। 'सह' का अर्थ है साथ, 'ज' का अर्थ है जन्मा। यह आपके साथ पैदा हुआ है, इस सर्वव्यापी शक्ति के साथ एकाकार होने, योग का अधिकार। यह आध्यात्मिक जागृति है, और यह दिव्य प्रेम की सर्वव्यापी शक्ति के साथ आध्यात्मिक मिलन भी है।

लेकिन जब ऐसा होता है, तो बहुत सारी चीज़ें घटित होती हैं। सबसे पहले, आपके जीन (वंशाणु) बदलते हैं! ये सबसे बड़ी बात होती है, कि आपका जीन बदल जाता है, यानी आपका डेटाबेस पूरी तरह बदल जाता है। जब ऐसा होता है, तो आपके साथ बहुत सी चीजें घटित होती हैं। उनमें से एक यह है, कि आपके स्वास्थ्य में सुधार होता है, क्योंकि यह कुंडलिनी जिन केंद्रों से होकर गुजरती है, वे आपके शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक अस्तित्व के लिए जिम्मेदार हैं। इसलिए, जब वह उन केंद्रों से गुजरती है, तो वह उनका पोषण करती है, वह उन्हें एकीकृत करती है और वह उन्हें सही करती है! इस तरह, न केवल डेटाबेस बदलता है, बल्कि आपका स्वास्थ्य भी बेहतर होता है।

आपको जानकर आश्चर्य होगा, दिल्ली में चार डॉक्टर हैं, जिन्होंने सहज योग के माध्यम से लोगों को ठीक करने के लिए एमडी की उपाधि प्राप्त की है। लेकिन आप पश्चिम में देखिए, यहां डॉक्टर ऐसी किसी भी चीज के खिलाफ बहुत एकजुट हैं, जो एलोपैथिक नहीं है। और इसीलिए अभी तक, हम पश्चिम में बहुत कुछ नहीं कर पाये हैं, लेकिन भारत में अब हमें एक ऐसा अस्पताल मिल गया है, जहां लोग आ सकते हैं, वहां रह सकते हैं, और अपनी असाध्य परेशानियों का इलाज करवा सकते हैं, और उनसे हमेशा के लिए पूर्णत छुटकारा पा सकते हैं।

यह कैसे घटित होता है, यह इस सर्वव्यापी शक्ति के माध्यम से होता है। एक बार जब आप इस सर्वव्यापी शक्ति से जुड़ जाते हैं, तो यह आपके माध्यम से प्रवाहित होने लगती है, और यह सबसे महत्वपूर्ण शक्ति है, जो आपको पूर्ण स्वास्थ्य लाभ देती है। साथ ही मानसिक रूप से भी यह आपको बेहतर बनाती है। उदाहरण के लिए, हम हर समय भविष्य और अतीत के बारे में सोचते रहते हैं। हमारे विचार भविष्य या अतीत से आते हैं। यह ऐसा है जैसे एक विचार उठता है, और गिर जाता है। एक और विचार उठता है, और गिर जाता है। और हम हर समय इन विचारों के वक्र पर कूद रहे हैं। हम विचारों के वक्रों पर कूद रहे हैं, न तो अतीत में, न ही भविष्य में, मुझे कहना चाहिए, लेकिन बीच में वर्तमान है, यह वर्तमान! अगर मैं आप से वर्तमान में रहने को कहूं, तो आप नहीं हो सकते! और वर्तमान में वास्तविकता है, क्योंकि अतीत समाप्त हो गया है और भविष्य का अस्तित्व नहीं है।

तो वर्तमान में रहने के लिए, हमें क्या करना चाहिए? कुछ नहीं! जब कुंडलिनी ऊपर उठती है, तो वह इन विचारों को फैला देती है, और बीच का स्थान वह है, जहां हम वर्तमान में होते हैं। तो क्या होता है? आप बिल्कुल निर्विचार समाधि में हो जाते हैं। आप निर्विचार होते हैं, लेकिन आप पूर्णतः जागरूक होते हैं।

यूंग ने इसके बारे में इतना स्पष्ट रूप से नहीं लिखा है, लेकिन उन्होंने संकेत दिया है, कि अगला विकास निर्विचार समाधि के स्तर पर होगा। आप भीतर बिलकुल शांत हो जाते हैं। यही वह बात है, जो शांति पैदा करती है, जब आप अपने साथ, और दूसरों के साथ बिल्कुल शांतिपूर्ण होते हैं। इतना ही नहीं, बल्कि आप एक ऐसे व्यक्ति बन जाते हैं, जो पूरे नाटक का साक्षी है, पूरी चीज़ को एक नाटक के रूप में देखता है, और आप परेशान नहीं होते हैं। अब यह कैसे होता है? मान लीजिए आप पानी में खड़े हैं, और लहरें उठती-गिरती रहती हैं, और आप उनसे डरते हैं। लेकिन मान लीजिए, आप नाव में चढ़ जाते हैं, और उन लहरों को देखते हैं, तो आप डरते नहीं हैं। लेकिन अगर आप तैरना सीख सकें, तो आप नीचे कूद सकते हैं, और लहरों से डरने वाले कई लोगों को बचा सकते हैं।

इसी प्रकार विचार तरंगें शांत हो जाती हैं, और आप अपने मन से ऊपर चले जाते हैं, और आप देखना शुरू कर देते हैं, कि आपके पास एक साक्षी शक्ति है। उदाहरण के लिए, मान लीजिए, कि अब यह एक सुंदर कालीन है, और मैं इसे देखती हूं। अब अगर मैं आत्म साक्षात्कारी नहीं हूं, तो क्या होगा कि मैं सोचना शुरू कर दूंगी। हे भगवान्! कितना अच्छा कालीन है! ये मुझे कहां मिल सकता है? मैं इसे कहां से खरीदूं? और हर तरह की विचार! लेकिन मान लीजिए, कि यह मेरा है, तो यह एक बड़ा सिरदर्द है, क्योंकि मैं सोचूंगी, कि मुझे इसका बीमा कराना चाहिए था वगेरह, लेकिन मान लीजिए, कि मैं अपने मन से परे हूं, तो क्या होगा? मैं कालीन देखती हूं, और इसे सुंदर बनाने के लिए कलाकार द्वारा इसमें जो भी आनंद डाला जाता है, मेरे सिर से नीचे की ओर शांति की बहुत सुखदायक धारा की तरह बहने लगता है! यह वास्तव में होता है! ऐसा होता है! यह केवल कुछ दावा करने, या आपको कुछ कहानियाँ सुनाने का प्रश्न नहीं है। यह एक ऐसी चीज़ है जो आपके पास है! और यही वह है, जिसकी आप खोज रहे हैं, चाहे आप इसे जानते हों या नहीं। आप सबसे पहले आत्मा बनने की खोज कर रहे हैं, और दिव्य प्रेम की इस सर्वव्यापी शक्ति के साथ एकजुट होने का प्रयास कर रहे हैं। ये सब वहां है, जिसके लिए आपको हिमालय जाने की जरूरत नहीं है। आपको व्रत-उपवास नहीं करना पड़ेगा। आपको पैसे नहीं देने होंगे। यह (पैसे की बात) सबसे बुरी बात है, क्योंकि आप इसके लिए पैसे कैसे दे सकते हैं? जरा सोचिए इस बारे में! प्रेम के लिए आप कितना पैसा देने वाले हैं?

आप इस हॉल के लिए भुगतान कर सकते हैं, लेकिन अपने उत्थान के लिए भुगतान नहीं कर सकते! ये समझने की बात है। यदि आप इसे सारे झूठे गुरुओं और अन्य सभी निरर्थक लोगों पर लागू करते हैं, जो आपसे पैसे लेते हैं, बेहतर होगा कि आप उनसे कहें, ''हम पैसे नहीं देंगे'' तुरंत वे भाग जाएंगे! उनका अस्तित्व नहीं रहेगा, क्योंकि वे केवल धन-उन्मुख हैं या उनमें से कुछ शक्ति-उन्मुख हैं। ऐसी बेवकूफी भरी बातें कुछ लोगों में होती हैं।

जैसे मैं बोस्निया से किसी मुस्लिम व्यक्ति से मिली, जो मुझ से मिलने आया था। तो मैंने उनसे पूछा, “आप निराकार ईश्वर में विश्वास करते हैं, फिर इस भूमि के लिए क्यों लड़ रहे हैं? लड़ने की क्या जरूरत है।” वह बोला, “नहीं! आप देखिए, यह कुरान में लिखा है।” मुझे नहीं लगता कि ऐसा है, लेकिन उस ने ऐसा कहा, हो सकता है। "यदि आप भगवान के नाम पर मरते हैं, और आपको दफनाया जाता है, तो आपका शरीर पुनरुत्थान के समय बाहर आ जाएगा, और आप अपना पुनरुत्थान पाओगे।” वे इसे कियामा कहते हैं। तब मुझे पता चला, कि यह सभी पुस्तकों में लिखा है। अब सोचिए पांच सौ साल बाद कौन सा शव कब्र से बाहर आएगा? (दर्शकों से हंसी की आवाज) मेरा मतलब है, कि हम को तार्किक होना चाहिए! और वे इस पर विश्वास करते हैं, कि वे शवों के रूप में पुनरुत्थान पाएंगे! शवों का पुनरुत्थान करने से क्या फायदा?

इस प्रकार मुझे कहना होगा, भारतीय दर्शन बेहतर है, क्योंकि वे कहते हैं, और जिसके बारे में भविष्यवाणी भी की गई है, कि एक समय आएगा, जब लोगों को पुनरुत्थान मिलेगा।

उनका वैश्विक उत्थान होगा और जीवन बदल जाएगा! इसका कुछ अर्थ है, कि जीवित व्यक्ति पुनर्जीवित हो जाएगा, न कि मृत शरीर या शायद कुछ हड्डियाँ या शायद हड्डियों का कुछ हिस्सा, जो कदाचित वहां रह गया हो।

तो तमाम बेतुकी बातें हमें यह भी अहसास कराती हैं, कि यह कैसा धर्म है जिसे हम अपनाने की कोशिश कर रहे हैं! अब धर्म तो आप को संतुलन देने के लिए था। सचमुच सभी धर्म आपको जीवन में संतुलन देने के लिए बनाए गए हैं, ताकि आप गलत जाल में न फंसें, आप खुद को नष्ट करने के लिए गलत काम न करें। लेकिन इसके बावजूद विशेष रूप से पश्चिम में, मुझे लगता है कि लोगों का मानना ​​है, कि उन्हें जीवन के हर पल का आनंद लेना चाहिए। मजा आना चाहिए! ये सभी भोग कितने आत्म-विनाशकारी हैं! जरा देखिए! यह मौज मस्ती है या सभी लोगों, सभी बच्चों को ख़त्म करने की आत्म-विनाशकारी प्रक्रिया! प्रगति के नाम पर इस तरह जो हो रहा है, कोई समझ नहीं सकता! हम कहाँ प्रगति कर रहे हैं? हम तो अपने विनाश की ओर बढ़ रहे हैं।

अब यदि आप किसी से कहेंगे, 'ऐसा मत करो!' तो वे इसे दस गुना अधिक करेंगे। यह ऐसी स्थिति है, यह एक मनोवैज्ञानिक मामला है, मुझे लगता है। लेकिन अगर आपको आत्मबोध हो जाए, तो आत्मा के प्रकाश में आप गलत काम नहीं करते। आप बस ऐसा मत करिए! आप हार मान लीजिए! रातों-रात लोगों ने नशा छोड़ दिया। मैंने कभी नहीं कहा, मत करो! क्योंकि अगर आप आधुनिक समय में ऐसा कहेंगे, तो आप में से आधे लोग चले जायेंगे। तो ये बताने की बात नहीं है! कुछ भी नहीं कहना है, बस अपने मन या चित्त को आत्मा के प्रकाश की ओर खोलने का प्रयास करें। तब आप इसे स्पष्ट रूप से देखेंगे!

मुझे आप को कुछ लोगों की कहानी बतानी चाहिए, छह अंधे लोग एक हाथी को (स्पर्श कर के) अनुभव कर रहे हैं, और सभी ने कहा कि यह हाथी एक बड़े खंभे की तरह है। किसी ने कहा ये सांप जैसा है। उन्होंने हर तरह की बातें कही, क्योंकि उन्होंने समग्रता नहीं देखी। एक बात यह थी, कि उन्होंने कभी उसे समग्रता में नहीं देखा, और वे लड़ने लगे। एक ने कहा, ऐसा दिखता है, दूसरे ने कहा, वैसा दिखता है। तो, सबसे पहले आपको जो चाहिए, वह है प्रकाश। आपकी आंखें इसके प्रति खुली होनी चाहिए।

इसके अलावा एक और उदाहरण यह हो सकता है, कि मानो मेरे हाथ में एक साँप है, और कोई मुझसे कहता है, क्योंकि अगर मैं जिद्दी हूँ, तो कोई मुझसे कहता है, कि तुम्हारे हाथ में एक साँप है, और पूरा अंधकार है, मैं देख नहीं सकती, इसलिए कहूंगी कि यह रस्सी है। मैं कहती रहूंगी कि यह रस्सी है, जब तक यह मुझे काट न ले। लेकिन मान लीजिए, कि थोड़ी रोशनी है, तो आप उस सांप को तुरंत छोड़ देंगे, क्योंकि आप जानते हैं, कि यह एक सांप है।

उसी तरह, एक बहुत बुद्धिमान व्यक्ति की तरह, जो कुछ भी विनाशकारी है, उसे आप छोड़ देते हैं। आप बस छोड़ देते है, आप को बताने की आवश्यकता नहीं है। यह बस काम करता है। तो आपके रोग ठीक हो जाते हैं। फिर मानसिक रूप से आप एक शांतिपूर्ण व्यक्ति बन जाते हैं। मुझे आप को बताना है, कि (सहज योग से) कई पागल ठीक हो गए हैं। और तीसरा, आप वह सब छोड़ देते हैं जो विनाशकारी है। अब आपके पास शांति है। आप पूरी तरह से एकीकृत हैं। आम तौर पर, आपके विचार एक तरफ होते हैं, आपका दिल दूसरी तरफ होता है, और शरीर तीसरी तरफ होता है। लेकिन इससे आप पूरी तरह से एकीकृत हो जाते हैं, और आप अपने बारे में इतना आश्वस्त, इतना गतिशील महसूस करते हैं, क्योंकि हर समय आपके अंदर ऊर्जा आती रहती है। तो आप देखिए, इसमें थकने की क्या बात है?

अब देखिए, मैं तिहत्तर साल की हूं, और हर तीसरे दिन यात्रा करती हूं। मेरा पासपोर्ट वैसे ही बहुत मोटा है, लेकिन मेरे पास तीन पासपोर्ट हैं, यह तीसरा है, और अब मुझे चौथा पासपोर्ट लेना होगा। लेकिन कोई बात नहीं, क्योंकि मुझे ऊर्जा को नई ऊर्जा से बदलने, या किसी अन्य बात की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है! हर समय ऊर्जा प्रवाहित होती रहती है।

यह कुछ इस प्रकार है। यह उपकरण (माईक) मुख्य स्रोत से जुड़ा है। अगर ऐसा नहीं है, तो इसका कोई मतलब नहीं है। इसकी कोई पहचान नहीं है। तो लोग अपना सिर मुंडवा लेंगे, या मैं नहीं जानती क्या करेंगे। हाल ही में उन्होंने बताया, कि वे भौंहों के बीच जगह बना रहे हैं। यह क्या है? ऐसा करने से आप को क्या मिलता है, मुझे समझ नहीं आता! लेकिन मुझे लगता है, कि यह उन्मत्तता की तरह है, कि कुछ करना ही होगा। हम अपने बारे में क्या करने जा रहे हैं! तो बेहतर होगा, कि अपनी नाक काट लें या जो चाहे करें! यहां ऐसा नहीं है! आप बस जुड़ जाते हैं, आप बस मुख्य स्रोत से जुड़ जाते हैं, ठीक उसी तरह जैसे एक बार कनेक्ट होने के बाद इस उपकरण की अपनी पहचान होती है, इसका अपना उद्देश्य होता है। आपके जीवन का उद्देश्य इस सर्वव्यापी शक्ति से जुड़ना है। बस इतना ही! यह बहुत आसान है! यह वहां है! आपको खुद पर ज़ोर देने की ज़रूरत नहीं है। आपको कुछ भी नहीं करना है। आप को पैसा नहीं देना। आप पर कोई बाध्यता नहीं है।

उदाहरण के लिए, हम बीज को धरती माता में डालते हैं। हम धरती माता को क्या हम धन देते हैं, जो वह हमें इतने सुंदर फूल देती है? अब, क्योंकि यह बीज में अंतर्निहित है, इसलिए यह अंकुरित होता है, और क्योंकि यह धरती माता में अंकुरित होने के लिए निर्मित है, इसलिए यह अंकुरित होता है। इतना सरल है! यह हमारे विकास की एक जीवंत प्रक्रिया है, और इसके लिए हमें बिल्कुल भी पैसा नहीं देना।

केवल बात यह है, कि कुछ श्रेणियों को आत्म साक्षात्कार नहीं मिल सकता है। उदाहरण के लिए, कोई व्यक्ति मूर्ख (अस्पष्ट) है, है ना? बेवकूफ है। तब आप उस व्यक्ति को आत्मसाक्षात्कार नहीं दे सकते, या कोई अहंकारी है, तो आप नहीं दे सकते। आप किसी ऐसे व्यक्ति को आत्म साक्षात्कार नहीं दे सकते, जो यहां कुछ संगठनों या किसी चीज़ का प्रतिनिधित्व करने के लिए आया है, और सोचता है कि यह संभव नहीं है। यह इतना सरल है, मुझे लगता है, कि कुछ लोगों को विश्वास ही नहीं हुआ, कि यह इतना सरल हो सकता है, क्योंकि यदि आप अपना भोजन इस तरह खा सकते हैं, तो वे सोचते हैं कि नहीं, दूसरे तरीके से क्यों नहीं खाया जाए? कुछ ऐसा ही, आप देखिए। कुछ दिमाग ऐसे होते हैं। वे यह नहीं सोच सकते, कि कुछ भी सरल हो सकता है, लेकिन जो भी महत्वपूर्ण है, वह सरल होना ही चाहिए। आप अपनी श्वास के बारे में सोचें। यदि आपको अपनी सांस लेने के लिए किसी शिक्षक के पास सीखने के लिए जाना पड़े कि कैसे सांस लें, तो आप कितने समय तक जीवित रहेंगे? यह बिल्कुल बहुत सरल है, जो आपके साथ घटित होने वाला है। और जानें, विश्वास रखें, कि आप सभी इसे आज रात प्राप्त करने जा रहे हैं।

यह इतना सरल है, कि आप देखिए जब मैं इस बार न्यूयॉर्क गई थी, तो मैंने कहा था कि इस बार मैं प्रयास करूंगी, कि कैसे कार्यान्वित होगा। पाँच मिनट में उन्हें आत्म साक्षात्कार प्राप्त हो गया! कल्पना करें न्यू यॉर्क के निवासी! उन्हें यह मिल गया, और उन्होंने इसे बहुत अच्छी तरह से प्राप्त कर लिया, और मैं आश्चर्यचकित थी, कि उन्होंने यह कैसे किया।

बेशक, रूस एक बहुत अलग देश है। रूस एक बहुत ही अजीब देश है, जहाँ साठ-पैंसठ लोग बहुत समझदार हैं, और बाकी लोग मार्लबोरो सिगरेट के दीवाने हैं (दर्शकों के हंसने का स्वर) या ऐसा ही कुछ। उनके लिए, अमेरिका महान है, आप देखिए! तो कुछ भी, सारा कबाड़ जो अमेरिका में नहीं बेचा जा सकता था, अब आप उसे वहां पा सकते हैं। (हँसी) सभी शराब, हर चीज़ अमेरिका से आती है, और वे सभी पाँच पूर्वी ब्लॉक देशों, रूस, यूक्रेन में इससे पैसा कमा रहे हैं, जहां हर सड़क इन छोटी दुकानों से भरी हुई है, जहां वे ये अमेरिकी चीजें बेच रहे हैं। लेकिन उनमें से बाकी - वैज्ञानिक, कलाकार, इसके अलावा सरकार के प्रभारी बहुत से लोग भी उच्च जीवन पाने में बहुत रुचि रखते हैं,और उनके वैज्ञानिक खोजों की काफी ऊंचाई पर पहुंच गए हैं। वे अलग दिशा में हैं। वे आध्यात्मिकता की बात कर रहे हैं, और बात कर रहे हैं, कि आध्यात्मिकता की शक्ति को कैसे मापें। मेरा मतलब है, कि यहां वैज्ञानिकों के बीच कोई आध्यात्मिकता के बारे में बात भी नहीं कर सकता। उनमें और हमारे बीच यही अंतर है। हालांकि हम लोकतांत्रिक हैं, लेकिन हमारे पास विकल्प हैं, और आपसे यहां बात करना आसान था, वहां नहीं जहां साम्यवाद (कामुनिज्म) है , लेकिन एक बात तय है, कि वे इतने भौतिकवादी नहीं हैं।

मैं नहीं जानती कैसे, लेकिन रूस में हजारों - हजारों लोग सहज योगी हैं। एक चुटकुला है! रूस से एक जगह टैगलियाती नाम की जगह है। एक व्यक्ति भारत में हमारे सेमिनार में आये, और वहां कुछ अमेरिकी भी थे। तो उन्होंने अमेरिकी से पूछा, “आपके पास कितने सहज योगी हैं? उस समय उन्होंने कहा, हमारे पास छप्पन हैं! बहुत ईमानदार, आप देखिए! केवल छप्पन थे! तो इस टैगलायती साथी ने कहा, हे भगवन्! केवल टैगलायती में, हमारे पास इक्कीस हजार हैं और अमेरिका में केवल छप्पन, या अमेरिका में आप छप्पन हजार हैं? उसने कहा, क्या! हम छप्पन ही हैं, छप्पन हजार नहीं!

तो आप कल्पना कर सकते हैं, कि इन लोगों में आध्यात्मिकता के प्रति भी संवेदनशीलता है। तथाकथित स्वतंत्रता में हमने वह संवेदनशीलता खो दी है। हम निरर्थक बातें अपना लेते हैं। मान लीजिए, कल कोई बालों का एक तरफ का हिस्सा काट देगा, हर कोई ऐसा करेगा। ये उद्यमी यहां इतने सफल हैं, क्योंकि वे हमें सुबह से शाम तक बेवकूफ बना सकते हैं। कभी-कभी उनकी स्कर्ट यहां तक ​​होती है, कभी-कभी यहां तक कभी-कभी यहाँ तक, और आप जिस भी घर में जाते हैं, वहाँ कपड़ों का ढेर पड़ा होता है। तो ये लोगों के साथ खेल रहे हैं! उन्होंने हर तरह की चीजें शुरू कर दी हैं।

उदाहरण के लिए, छुट्टियाँ मनाना एक और चीज़ है, जो मैंने देखी है। हालाँकि वे कहते हैं, कि इससे उन्हें त्वचा संबंधी परेशानियाँ होती हैं। क्योंकि जब मैं लंदन में थी, तो मुझे आश्चर्य हुआ, हम कभी शुक्रवार को बाहर नहीं जा सकते थे, और कभी शनिवार की शाम को भी नहीं। कारण यह था, कि लंदन के दक्षिण के लोग लंदन के उत्तर में जाते थे, उत्तर के दक्षिण में आते थे। वे घर में नहीं रहेंगे, एक-दूसरे से बात नहीं करेंगे, बल्कि छुट्टियों के लिए जायेंगे, आप देखिए। अगर वे छुट्टियों के लिए बाहर नहीं जाते हैं, तो यह उनके लिए एक संकट है। यह एक संकट है। घर से भागने वाले इन लोगों को हम अपनी भाषा में (भगोड़े) 'रनएवेज' कहते हैं, आप देखिए। लेकिन इसका हमारे जीवन में इतना दूरगामी प्रभाव पड़ा है। मुझे लगता है, कि हम अपने बच्चों से बात नहीं करते, हम अपनी पत्नियों से बात नहीं करते। हम हर समय चिंतित रहते हैं। पुरुष सामान ढो रहे हैं। कभी-कभी वे एक दिन के लिए सड़कों पर फंसे रहते हैं, क्योंकि इतना जाम होता है, कि वे चल नहीं सकते, और वे छुट्टी मना रहे होते हैं!

तो यह भी किसी उद्यमी की तरकीब है। कोई बहुत चालाक है, लेकिन लोग फिर भी गाड़ी में सवार हैं! मुझे नहीं पता, कि वे इससे कब बाहर निकलेंगे। लेकिन इस तरह हमारे पास ध्यान करने का भी समय नहीं है! मैंने सहज योगियों को देखा है, जो इन पांच देशों और रूस में हैं, वे बहुत गहरे हैं क्योंकि वे ध्यान करते हैं। वे छुट्टियों पर नहीं जाते। लेकिन यहां समस्या यह है, कि आप सभी को अपना आत्म साक्षात्कार प्राप्त हो जाएगा, इसमें कोई संदेह नहीं है। आप को यह प्राप्त होगा, लेकिन फिर यह खो जाएगा।

अब मान लीजिए हम कहते हैं, मुझे नहीं पता कि कितने लोग (फॉलो अप के लिए) हैं? "बाद में मैं उनसे (सहज योगियों से) पूंछती हूं, "फॉलोअप के लिए कितने आए?" "पाँच या तीन!” मैंने कहा क्यों? क्या हुआ?" "वे छुट्टी पर गए हैं।" ये 'हॉलीडे‘ तो ठीक है, लेकिन हमारे अंदर भी एक 'पवित्र दिन' है, जिसे हमें हासिल करना हैं। हमें अपनी पवित्रता को जानना होगा। हमें अपनी आध्यात्मिकता को जानना होगा। हमें अपने गुणों का आनंद लेना है, और हमें बहुत गतिशील और दयालु लोगों का एक नया समाज बनाना है। वही हमारा भविष्य है। लोग यही हासिल करने जा रहे हैं। यह सारी बेचैनी, यह सारा पागलपन, यह सब गायब हो जाएगा, और आप वास्तव में ऐसे सुंदर शांतिपूर्ण लोग बन जाएंगे, जो एक दूसरे का आनंद लेंगे। यह बहुत आश्चर्यजनक है, कि आनंद हमारे बिल्कुल निकट है, और हम उससे बाहर निकल रहे हैं। हम इसका सामना नहीं करना चाहते।

तो मेरा दूसरा अनुरोध है, अपना आत्म साक्षात्कार प्राप्त करने के बाद, कृपया हमारी सामूहिकता में आने का प्रयास करें। हमारे यहां बहुत अच्छे सहज योगी हैं, मैं आपको यह बता सकती हूं। जो लोग यहाँ हैं, वे उत्कृष्ट हैं! लेकिन आप भी बन जाते है, जैसे बीज वृक्ष बनता है, आप को भी विकसित होना है। बेशक, जिसके लिए आपको पैसा नहीं देना पड़ेगा, क्योंकि मैं जानती हूं कि ऐसे लोग हैं, जिनके पास एक परिचयात्मक पत्र है, और दूसरा पत्र है पैसा इकट्ठा करने के लिए। नहीं! इसके लिए हमें किसी धन की जरूरत नहीं है। यह (आत्म साक्षात्कार) बिल्कुल मुफ़्त है और यह अद्भुत काम करता है। लेकिन अगर आप वास्तव में सोचते हैं, कि आपको एक नया समाज बनाना है, और आपको अपने स्वयं के एक बहुत ही शांतिपूर्ण, सुंदर समाज में रहना है, तो आपको इस के लिए थोड़ा समय देना होगा।

यह समझना भी बहुत ज़रूरी है, कि आज हम एक बेहद अराजक दुनिया में जी रहे हैं। हम नहीं जानते, कि हमारे बच्चों का क्या होगा। हमें नहीं पता, कि इन विभिन्न देशों में क्या स्थिति होगी, हमारा भविष्य क्या होगा?

इसलिए, मैं बस इतना चाहती हूं, कि आप यह जानें कि आप आत्मा बन सकते हैं, जो ईश्वर के राज्य में प्रवेश की तरह है। बहुत सारे चमत्कार होते हैं। सभी मुझे लिखते हैं, अब मुझे नहीं पता कि उस बारे में क्या कहूं। इन लोगों के साथ जिस तरह के चमत्कार हुए हैं, मैं वास्तव में आश्चर्यचकित हूं, क्योंकि यह सर्वव्यापी शक्ति उन को संभाल लेती है। यह एक बहुत ही कुशल, बेहद प्रेमपूर्ण और बुद्धिमान शक्ति है, जो आपका मार्गदर्शन करती है, जो आपकी रक्षा करती है, आपकी देखभाल करती है, आपका पोषण करती है, और बहुत सारी बातें होती हैं!

अब उदाहरण के लिए, वैंकूवर में हमारे सहज योगी थे जो बेरोजगार थे। उन सभी को बहुत अच्छी नौकरियाँ मिल गई हैं। ऐसा नहीं है, कि वे सभी बहुत ज़्यादा पढ़े-लिखे हैं। लेकिन हुआ क्या? उनका चित्त जाग्रत हो गया। उनका चित्त कितना अच्छा हो गया। जाग्रत का मतलब है, कि उनकी बुद्धि में सुधार होता है। उन्हें चीजें साफ-साफ दिखने लगीं। स्वाभाविक रूप से उन्हें नौकरियाँ मिलीं। वे बकवास से विचलित नहीं होते हैं, और वे बात करने के लिए बहुत अच्छे लोग हैं। उनके पास अच्छी नौकरियाँ हैं, और उन सभी को अच्छी नौकरियाँ मिली हैं। मैं हैरान हूँ। जब मैं पहली बार वैंकूवर आई थी, तो वे ज्यादातर हिप्पी बनने वाले थे। यही स्थिति थी, और आज मैं उन्हें बहुत अच्छी स्थिति में, बहुत खुश पाती हूँ।

यह विश्वास करना आसान नहीं है, कि आप इतने शानदार हैं। आप सचमुच अपनी महिमा नहीं जानते, ऐसा मालूम होता है। मान लीजिए, आपके पास एक टेलीविजन है, जिसे आप किसी दूर-दराज के गांव में ले जाते हैं, जहां उन्होंने कभी टेलीविजन नहीं देखा है। और आप उन्हें बताएं कि, "इस टेलीविजन में आप फिल्में देख सकते हैं, आप आकृतियां देख सकते हैं।" वे कहेंगे, "क्या!'' यह बक्सा! आपके कहने का मतलब यह है, कि यह बक्सा ऐसा करने जा रहा है? इसी प्रकार हम सोचते हैं कि हम डिब्बे हैं। किसी काम के लिए अच्छे नहीं! लेकिन जब आप इसे मुख्य स्रोत से जोड़ देते हैं, तो आप देखते हैं कि आप को कितने शानदार ढंग से बनाया गया है। हम अपने भीतर बहुत ही शानदार ढंग से निर्मित हैं। हम अपने आप को अंदर से नहीं जानते। हम केवल इसके बाहरी हिस्से को जानते हैं। लेकिन एक बार जब हम अंदर जान लेंगे, तो आपको पता चल जाएगा, कि आप वास्तव में महान हैं, और ऐसी बहुत सी चीजें हैं जिन्हें हमें जानना है।

हमारा मस्तिष्क भी जाग्रत हो जाता है, और मैंने ऐसे विद्यार्थियों को देखा है जो पढ़ाई में बहुत खराब थे, वे हमेशा सूची में शीर्ष पर आते हैं। यहां तक ​​कि एक लड़की, जिसे मिस यूनिवर्स मिला, वह एक सहज योगिनी हैं। वह मेरे पास आई, उसने मुझसे पूछा, ''मां क्या मुझे यह करना चाहिए, यह काम? मुझे यह बहुत पसंद नहीं है।” मैंने कहा, 'क्यों?' उसने कहा,“वहां कभी-कभी अजीब कपड़े पहनने पड़ते हैं।” मैंने कहा, “नहीं! ज्यादा से ज्यादा तैराकी का परिधान पहनना होता है, जिसे वैसे भी तुम पहनती हो। तो, कोई बात नहीं!'' वह मिस यूनिवर्स बन गई! देखिये, वह बहुत शर्मीली इंसान थी, और उसकी माँ ने कहा, "मुझे नहीं पता!" सिर्फ खूबसूरती की वजह से नहीं। मैं यह नहीं कहूंगी, कि पश्चिमी दृष्टिकोण से वह इतनी खूबसूरत लड़की है, लेकिन उनमें शिष्टता थी, उनमें संतुलन था। उसके पास एक प्रकार की बुद्धिमत्ता थी, जिससे वे लोग वास्तव में आश्चर्यचकित रह गए। वह इतनी बुद्धिमान कैसे है? वह सिर्फ एक भारतीय लड़की है। वह इतनी बुद्धिमान कैसे है?

सवाल यह है, कि ऐसा व्यक्ति जो आत्म साक्षात्कारी होता है, उसका अवशोषण का पूरा रवैया सोच विचार से कहीं अधिक हो जाता है। हम हर समय प्रतिक्रिया और सोच विचार करते रहते हैं। आप इसे देखते हैं, अच्छा नहीं! वह वाला, अच्छा! आप बस देखिये! एक बार जब आप उस चीज़ को देखना शुरू कर देते हैं, तो आपको बस एक फोटोजेनिक, हम कह सकते हैं कि याददाश्त इतनी तेज़ हो जाती है। आप जानते हैं कि यह क्या है, यह कैसा था, लेकिन आप प्रतिक्रिया नहीं करते। आप प्रतिक्रिया नहीं करते हैं, आप बस इसे देखते हैं, और इस तरह एक व्यक्ति बहुत बुद्धिमान बन जाता है, लेकिन चालाक नहीं। वह समस्याओं के बारे में बहुत अधिक शामिल हो जाता है।

अब एक सज्जन ईरान से आये हैं। वह काफी कम उम्र के हैं, लेकिन वह बहुत गतिशील है, और वह किसी भी चीज़ से नहीं डरते। वह कहते हैं, "माँ, मैं यह सब कहने जा रहा हूँ", और मैंने कहा, "मुसलमानों के बारे में क्या? उन्होंने कहा, मैं परवाह नहीं करता!" मैंने कहा क्यों?"

“क्योंकि जब वे सच्चाई देखेंगे तो आएँगे। आख़िरकार उन्हें सत्य को देखना ही पड़ेगा, है ना? किसी को तो उन्हें बताना ही होगा।” मैं चकित थी, यह नवयुवक, बिल्कुल एक शांत व्यक्तित्व वाला है, जो क्रांतिकारी बन रहा है, बिना नाराज हुए, बिना गुस्सा हुए, लेकिन प्यार और स्नेह से। वह कहता है, “मैं उन्हें जीत लूँगा! मैं उन्हें बताऊंगा कि वास्तविकता क्या है।” यह लड़ाई नहीं है, यह बाहरी परिवर्तन नहीं है, बल्कि यह आंतरिक परिवर्तन है जिसकी आवश्यकता है।

और अंत में, यह चित्त जो इतना जाग्रत हो जाता है, आपको बता सकता है कि आपके साथ क्या समस्या है। अपनी उंगलियों पर आपको पता चल जाएगा। आपको अपनी उंगलियों पर पता चल जाएगा, कि कौन से चक्र संकट में हैं। निदान हो गया! मान लीजिए, यदि आपको इनमें से किसी एक अस्पताल में निदान के लिए जाना है, आप केवल निदान से आधे मर लेते हैं (दर्शकों की हंसी, श्री माताजी भी हंसती हैं) फिर दूसरा भाग उपचार, इंजेक्शन और काटना, लगाना है। यहां आप को कुछ करना नहीं है। यह आपकी अपनी शक्ति है। यह उस चक्र पर जाकर इसका उपचार करेगी। तो, आपको डॉक्टर की फीस की चिंता करने की ज़रूरत नहीं है। आप स्वयं अपने डॉक्टर हैं। आप स्वयं अपने स्वामी हैं, और आप स्वयं को नियंत्रित करते हैं।

अब मान लीजिए, कि आप अपने स्वयं के चक्रों को ठीक कर सकते हैं, तो आप दूसरों के चक्रों को भी बहुत आसानी से ठीक कर सकते हैं। क्यों नहीं? यह एक प्रकाश, एक मोमबत्ती की तरह है जो ज्योतिर्मय है, कई मोमबत्तियों को रोशन कर सकती है। यह इतना सरल है, और ये सभी शक्तियाँ जन्म लेती हैं, पहले से ही मौजूद हैं। मुझे कहना चाहिए कि क्षमताएँ हैं, वे अभिव्यक्त होने लगते हैं। आप दूसरों को आत्मसाक्षात्कार दे सकते हैं। आप उनका इलाज कर सकते हैं। आप ये सभी काम कर सकते हैं, और इसे करने में आपको बहुत आनंद आएगा। वास्तव में इसका आनंद आता है, क्योंकि ऐसा आनंद, ऐसा आनंददायक क्षण होता है, जब आप देखते हैं, कि आप किसी को आत्मसाक्षात्कार दे रहे हैं।

तो यह वास्तविक पुनर्जन्म है, जिसके बारे में मैं बात कर रही हूं, न कि केवल एक प्रमाण पत्र - “मेरा पुनर्जन्म हुआ है।'' मैं क्या हूं? बिलकुल वैसे ही जैसे दूसरे हैं। आपका दोबारा जन्म हुआ है। यह कैसे हो सकता है? आपके पास शक्तियां होनी चाहिए, करुणा और गतिशीलता की विशेष शक्तियां। यदि आपके पास ये शक्तियाँ नहीं हैं, कि हाथ से आप दूसरों की कुंडलिनी उठा सकते हैं, तो केवल स्वयं को प्रमाणित करने और इसके बारे में संतुष्ट महसूस करने से क्या फायदा?

हमारे लिए वास्तव में आनंद लेने का समय आ गया है। आनंद के सागर में छलांग लगाने के लिए, जहां आनंद में कोई सुख या दुख नहीं है, क्रिया प्रतिक्रिया नहीं है। यह एकमेव है, यह आनंद। आप बस आनंदित हो जाएं। यदि यह बेतुका है, तो आप इसके पीछे का हास्य देखते हैं। यदि यह सुंदर है, तो आप सौंदर्य का आनंद लेते हैं। आपके संबंधों में वासना और लालच कुछ भी नहीं है, बल्कि जो होता है वह है जीवन का एक सौंदर्यपूर्ण आनंद।

हमारे यहां विवाह होते हैं, बहुत ही विवेकपूर्ण शादियाँ होती हैं। हमारे यहां अंतर्राष्ट्रीय विवाह होते हैं, और उनके बच्चे जन्म से ही आत्म साक्षात्का‌री होते हैं। उनके यहां संत पैदा हो रहे हैं। ऐसे बच्चों को पाकर बहुत खुशी होती है। वे कितनी मीठी बातें करते हैं, कितनी मधुरता से सबको एक साथ लाते हैं। वे कैसे सब कुछ साझा करना पसंद करते हैं, यह देखने लायक है, कि सहज योग की यह दुनिया कितनी गतिशील, इतनी करुणामय, इतनी प्रेमपूर्ण है।

हमारे भारत में सेमिनार होते हैं, और पैंसठ देशों से लोग आते हैं। मैंने उन्हें कभी लड़ते, झगड़ते, नहीं देखा! कभी नहीं! वे बहुत प्रसन्न रहते हैं। अत्यंत आनंदित लोग! अभी हाल ही में, किसी ने कुछ सहज योगियों को देखा। उन्होंने कहा, "आप बहुत प्रसन्न लोग हैं।" सचमुच वे हैं! लोग एक दूसरे के साथ बहुत खुश हैं। बेशक, वे एक-दूसरे की टांग खींचते हैं। वे बहुत सामान्य हैं। वे बहुत विनोदी हैं, लेकिन आपको अपना पहनावा बदलने की जरूरत नहीं है। आपको अपना सिर मुंडवाने की जरूरत नहीं है। ऐसा कुछ नहीं करना! यह बस अंदर ही होता है। कुछ घटित होता है, और आप वही बन जाते हैं जो आप हैं। हमें कहना चाहिए, कि यह युग आनंद का है,और यह आनंद आप सभी को मिलना चाहिए, यह आपका अपना अधिकार है।

आपका बहुत-बहुत धन्यवाद! (दर्शकों की ओर से तालियों की आवाज)

जब आप आत्मा बन जाते हैं, तो आप सामूहिक रूप से जागरूक हो जाते हैं। इसका मतलब है, कि आप दूसरों को भी अपनी उंगलियों पर महसूस कर सकते हैं। फिर दूसरा कौन है? जैसे बूंद सागर में गिरती है, और सागर बन जाती है। सामूहिकता बहुत सुंदर है। हर कोई एक दूसरे की मदद करने की कोशिश करता है, एक दूसरे के प्रति दयालु होता है, मन से नहीं बल्कि अंदर से। आप स्वाभाविक रूप से नैतिक बन जाते हैं। आपसे यह नहीं कहा जाएगा कि "ऐसा मत करो!" वैसा मत करो!” आप सहज रूप से नैतिक बन जाते हैं। आपको बताने के लिए किसी पुलिसकर्मी की जरूरत नहीं है। आपको किसी जेल की जरूरत नहीं है, कुछ भी नहीं! अपने भीतर आप पूरी तरह से नैतिक बन जाते हैं, और अपने गुणों का आनंद लेते हैं।

अतीत को भूल जाएं! अतीत में जो कुछ हुआ, उसे भूल जाएं! अब चिंता मत करिए! इस समय इस पर चर्चा या विचार नहीं किया जाना चाहिए।

तो मैं समझती हूं, कि आप सभी को अपना आत्म साक्षात्कार प्राप्त करने में मुश्किल से दस मिनट लगेंगे। मैं आपसे वादा करती हूं, लेकिन सबसे पहले, जैसा कि मैंने आपसे कहा था, कि आपको अपने अतीत को याद नहीं रखना है। आपको बिल्कुल भी दोषी महसूस नहीं करना है। किसी भी चीज़ के बारे में बिल्कुल भी दोषी महसूस न करना। आप ने जो भी गलतियाँ की हैं, ठीक है। आपको उस समय इसका सामना करना चाहिए था। इसे जीवन भर और अब यहाँ ढोते रहने से क्या फायदा? तो बेहतर होगा, कि जान लें कि आप दोषी नहीं हैं। सोचिए अगर आप दोषी होते तो जेल में होते। आप यहां क्यों हैं? इसलिए, यह सोचकर खुद को यातना देना बिल्कुल गलत है, "मैं दोषी हूं!" मैं दोषी हूँ! मैं दोषी हूँ!”

लेकिन क्या आप जानते हैं, कि अगर आप दोषी महसूस करते हैं तो क्या होता है? बायीं ओर का यह केंद्र पकड़ लेता है, और आपको एंजाइना नामक बीमारी हो जाती है, जिसे आप जानते हैं कि यह हृदय है। आपको कभी-कभी बहुत खराब स्पॉन्डिलाइटिस भी हो जाता है, कभी-कभी आपकी मांसपेशियां बहुत सुस्त हो जाती हैं। साथ ही आपके अंग भी सुस्त हो सकते हैं, इस एक दोष के कारण कि आपको दोषी महसूस होता है। इसलिए आपको स्वयं को क्षमा करना होगा, क्योंकि यदि आप अभी क्षमा नहीं करते हैं, तो यह चक्र ख़तरे में पड़ जाएगा, और कुंडलिनी ऊपर नहीं उठ सकेगी।

अपने पूरे जीवन में, बिना किसी कारण के, आप स्वयं को दोष देते रहे हैं, स्वयं का मूल्यांकन करते रहे हैं, और आपने क्या हासिल किया? लेकिन इस समय विशेष रूप से, अपने ऊपर दया करिए और बिल्कुल भी दोषी महसूस मत करिए! दोषी महसूस करने की कोई बात नहीं है। दोषी महसूस करना एक फैशन हो गया है। हर किसी को यह जानना होगा, कि यदि आपने कुछ भी गलत किया है, तो उसे पहले ही माफ कर दिया गया है, वरना आपको कष्ट उठाना पड़ता। उसके कारण आप को कष्ट तो नहीं हुआ! अत: इस पर विचार नहीं किया जाना चाहिए। इसके अलावा, दिव्य प्रेम की यह सर्वव्यापी शक्ति क्षमा का सागर है। तो आपने जो भी गलतियाँ की होंगी, या जिसके लिए आप दोषी महसूस करते हैं, वह सब धोया जा सकता है, सर्वव्यापी प्रेम के इस सागर में पूरी तरह से विलीन किया जा सकता है!

फिर दूसरी बात यह है, कि आपको क्षमा करना होगा। सबको माफ कर दो! उनके बारे में सोचना भी नहीं चाहिए। अब बहुत से लोग कहते हैं, "हम क्षमा नहीं कर सकते!” अब तार्किक रूप से, चाहे आप क्षमा करें या न करें, आप क्या करते हैं? आप क्या करते हैं?? आप कुछ नहीं करते। वे कहते हैं, “मैं माफ नहीं कर सकता! यह बहुत कठिन है।” लेकिन आप क्या करते हैं? कुछ नहीं! लेकिन वास्तव में आप क्या करते हैं, आप हर समय खुद को प्रताड़ित करते हैं। जब आप माफ नहीं करते हैं, तो आप गलत हाथों में खेलते हैं, और खुद को प्रताड़ित करते हैं। सबसे अच्छी बात है माफ करना और भूल जाना! देखिये कितना हल्का, आप कितना हल्का महसूस करेंगे।

तो यह बिल्कुल भी मुश्किल नहीं है। आप को बस इतना कहना है कि “मां मैंने सबको क्षमा कर दिया।” ये कार्य करता ह! मैं आपको बताती हूं, कि यह काम करता है! लेकिन ख़तरा यह है, अगर आप माफ़ नहीं करते। फिर मस्तिष्क में ऑप्टिक चियास्मा पर यह केंद्र बिल्कुल संकुचित हो जाता है, बिल्कुल ऐसे ही। यदि आप क्षमा नहीं करेंगे तो यह नहीं खुलेगा, लेकिन यदि आप क्षमा करेंगे तो यह खुल जायेगा। जब तक यह खुलेगा नहीं, कुंडलिनी कैसे गुजर सकती है। तो हमें अपनी कुंडलिनी की इस तरह से मदद करनी होगी, कि हमें वास्तव में क्षमा करना चाहिए। कभी मत कहें, "मैं माफ नहीं कर सकता", क्योंकि आप कुछ नहीं करते।

तो ये दो चीजें हैं जो बहुत महत्वपूर्ण हैं।

और तीसरा बहुत सरल है। आपको अपने जूते बाहर निकालने पड़ेंगे। मुझे आशा है कि आपको कोई आपत्ति नहीं होगी। मैं आपसे अनुरोध कर रही हूं, क्योंकि इंग्लैंड में जब मैंने उनसे कहा, "अपने जूते निकाल लीजिए", तो उनमें से आधे बाहर चले गए। (दर्शकों की हँसी) अंग्रेज अपने जूतों को लेकर अजीब होते हैं। (श्री माताजी भी हंसती हैं) अब नहीं, अब नहीं, लेकिन ऐसा हुआ करता था।

और आखिरी बात, आपको पूर्ण रूप से आश्वस्त होना चाहिए, कि आज रात आपको आत्म- साक्षात्कार प्राप्त होने वाला है! बिल्कुल!

अब मुझे यह स्वीकार करना होगा, कि मैं आप पर आत्म-साक्षात्कार के लिए दबाव नहीं डाल सकती। यह आपकी पसंद होनी चाहिए, क्योंकि मैं आपकी स्वतंत्रता का सम्मान करती हूं। मैं किसी भी तरह से इसे आप पर थोप नहीं सकती। इसलिए जो लोग आत्म-साक्षात्कार नहीं प्राप्त करना चाहते, उन्हें हॉल छोड़ देना चाहिए। उनका कुछ नहीं बिगड़ेगा। वे बिल्कुल ठीक रहेंगे। मैं जानती हूं कि इसमें कोई समस्या नहीं है, लेकिन फिर भी जो नहीं चाहते, उन्हें वास्तव में हॉल छोड़ देना चाहिए, और दूसरों को मौका देना चाहिए।

ठीक है! तो आइए हम छोटा तरीका अपनाएं, जो मैंने न्यूयॉर्क में किया था, शायद यहां भी काम कर जाए (तालियों और खुशी की आवाज जिस पर श्री माताजी खुशी से मुस्कुराती हैं) मुझे ऐसी उम्मीद है।

आप को दोनों हाथ इस तरह मेरी ओर करने हैं। जैसा कि मैंने आपको बताया, ये केंद्रीय तंत्रिका तंत्र के पांच, छह और सात केंद्र हैं। तो, आप अपना हाथ ऐसे ही थोड़ा ऊपर रखें। अब जो कुर्सी पर बैठे हैं, अपने दोनों पैर एक-दूसरे से दूर रखें, क्योंकि ये दो शक्तियां हैं, लेकिन जमीन पर बैठने वालों को ऐसा नहीं करना चाहिए, ऐसा करने की जरूरत नहीं है। अब, कृपया दोनों दोनों हाथ मेरी ओर करें।

अब बाएं हाथ को ऐसे ही रखें, और दाएं हाथ को ब्रह्मरंध्र वाले हिस्से के ऊपर रखें। यहाँ! ऊपर! सिर पर नहीं बल्कि ऊपर! अब, कृपया अपना सिर जितना संभव हो सके झुकाएं! कृपया अपना सिर झुकायें! अब आप स्वयं देखें, क्या आपके ब्रह्मरंध्र, जो कि आपके बचपन में नरम हड्डी थी, से कोई गर्म या ठंडी हवा जैसा चैतन्य आ रहा है। कृपया अपना सिर झुकाएँ, और स्वयं देखें। कभी-कभी गर्म होता है। यह गर्म है, क्योंकि आपने खुद को क्षमा नहीं किया है या आपने दूसरों को क्षमा नहीं किया है।

तो कृपया ऐसा करने का प्रयास करें! कृपया क्षमा करें! बस अपने दिल में कहिए, "माँ, मैंने सभी को क्षमा कर दिया!" और "माँ, मैं स्वयं को क्षमा करता हूँ!" बस यही कहिए! और आप आश्चर्यचकित हो जायेंगे, कि इस में कैसे सुधार हो जायेगा।

अब, कृपया अपना दाहिना हाथ मेरी ओर रखें, और अपना सिर फिर से नीचे कर लें। और बाएं हाथ से आप ब्रह्मरंध्र के ऊपर फिर से खुद ही देख सकते हैं, कि यह गर्म या ठंडी हवा है जैसे कि आपके ब्रह्मरंध्र से चैतन्य निकल रहा है। आप स्वयं देखिये! कृपया अपना सिर झुकायें! कृपया झुकें! कभी-कभी कुछ लोगों को ये बहुत दूर तक आता है। कभी-कभी वे इसे करीब महसूस करते हैं, इसलिए आपको स्वयं देखने के लिए अपना हाथ हिलाना पड़ता है। अब इसमें संदेह मत करिए! संदेह आपकी मानसिक गतिविधि से आता है। संदेह मत करिए! स्वयं ही इसे देखिये!

अब फिर से बाएं हाथ से। अब अपना हाथ अपने ब्रह्मरंध्र के करीब न रखें। ब्रह्मरंध्र आपके माथे के सामने नहीं बल्कि आपके सिर के ऊपर होता है। बस उसे रखिए! यह वास्तव में बपतिस्मा का साकार रूप है। यह बपतिस्मा का साकारीकरण है। अपना सिर झुकाएँ, और स्वयं देखें। फिर से ध्यान से स्वयं ही देखें! अपना हाथ अपने माथे के ऊपर या सामने न रखें, बल्कि ब्रह्मरंध्र के ऊपर रखें, जो आपके बचपन में नरम हड्डी थी। अब ध्यान से आप खुद को देखिए!

अब अपने दोनों हाथों को इसी तरह आसमान की ओर उठाएं। आपके दोनों हाथ! अपना सिर पीछे की ओर झुकाइए! और इनमें से केवल एक प्रश्न, केवल एक तीन बार पूंछिए। आप जो भी पूछना चाहें। पहला, पहला प्रश्न - "माँ, क्या यह पवित्र आत्मा की ठंडी हवा है?" इस प्रश्न को तीन बार पूछें या आप पूछ सकते हैं- 'माँ क्या यह दिव्य प्रेम की सर्वव्यापी शक्ति है?’आप यह प्रश्न तीन बार पूछ सकते हैं, या आप पूछ सकते हैं, "माँ क्या यह परम चैतन्य है, रुह?" यह प्रश्न तीन बार पूछें! अब, कृपया अपने हाथ नीचे रखें!

अब कृपया अपने दोनों हाथ मेरी तरफ ऐसे करिए और सोचिए मत! सोचना बंद करें! आप इसे रोक सकते हैं। बस सोचना बंद करें! आंखें बंद करने की जरूरत नहीं। कुछ लोगों को ये नीचे, यहां, नीचे, हथेली के नीचे अनुभव होता है। तो इसे पीछे धकेलो! कुछ लोगों को यह ऐसे आता है। इसे पीछे धकेलो!

अब फिर बिना सोचे मुझे देखें।

वे सभी जिन्होंने उंगलियों पर, या हथेली पर, या ब्रह्मरंध्र के ऊपर ठंडी या गर्म हवा महसूस की है, कृपया अपने दोनों हाथ उठाएं।

हे भगवन्! मुझे कहना ही होगा कि वास्तव में वैंकूवर न्यूयॉर्क से भी बड़ा है! आपका बहुत-बहुत धन्यवाद! आप सभी! (तालियों की आवाज) बहुत बढ़िया! उत्कृष्ट! सुंदर! विश्वास नहीं हो रहा! यह बहुत महान है! यह सचमुच है!

ईश्वर की कृपा आप सब पर बनी रहे! भगवान आप पर कृपा करे!!

यदि आपके कोई प्रश्न हैं, तो आप उन्हें लिख कर भेज सकते हैं। मैं उन सभी का उत्तर दूंगी। हमारे सहजयोगी भी उत्तर दे सकते हैं। वे बहुत अच्छी तरह से सज्ज हैं, लेकिन इस समय अब बात आनंद लेने की है। आनंद अवश्य लें!

(श्री माताजी अपनी दाहिनी ओर मुड़कर सहज योगियों को संबोधित करती हैं) क्या आप एक गीत गाना चाहेंगे? ठीक है!

(फिर सामने देखकर और भीड़ को संबोधित करते हुए) यदि आप बुरा न मानें तो एक गाना वे मेरी उपस्थिति में गाना चाहेंगे।

हां! क्या कह रहे हैं? हां, आप क्या कह रहे हैं? (श्री माताजी सहज योगियों से हिंदी भाषा में बात कर रही हैं।)

(श्री माताजी नए लोगों को एक किताब दिखा रही हैं) यह किताब है। आप इसे मुफ्त में ले सकते हैं। मुझे कहना होगा, कि यह सहज योगियों द्वारा बहुत अच्छी तरह से काम किया गया है, और मैं इसे दिल से आशीर्वाद देती हूं। (तालियाँ)

यह गीत एक कवि का है जो कहता है, हे माँ! मुझे (ईश्वर से) योग दो, मिलन दो और यह भी वर्णन करता रहता है, कि मैं यह कैसे त्याग दूं और वह कैसे छोड़ूंगा, लेकिन आप मुझे योग दो।

और यह हमारे गांवों में गाया जाता है, लेकिन मुझे लगता है, कि अब समय आ गया है, कि उन्हें यह योग मिले।

संजय तलवार के नेतृत्व में संगीतकारों का समूह 'महामाया महाकाली' भजन गाता है, और दर्शक इस आनंददायक प्रस्तुति का आनंद ले रहे हैं...श्री माताजी संगीतकार को सुनते हुए बहुत प्रसन्न दिख रही हैं।

गीत समाप्त होता है, और श्री माताजी अपने सिंहासन से उठती हैं। हाथ जोड़कर वह दर्शकों का अभिवादन करती हैं। वह मुस्कुरा रही हैं, बहुत दीप्तिमान दिख रही हैं और लोगों से बात कर रही हैं -'अब आप आनंद लीजिए!' इन शब्दों के साथ वह मंच से दूर जाती नजर आ रही हैं।

Vancouver (Canada)

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