Tattwa Ki Baat Day 2

Tattwa Ki Baat Day 2 1981-02-16

Location
Talk duration
65'
Category
Public Program
Spoken Language
English, Hindi, Marathi

Current language: Hindi, list all talks in: Hindi

The post is also available in: English.

16 फ़रवरी 1981

Public Program

University of Delhi, New Delhi (भारत)

Talk Language: Hindi | Transcript (Hindi) - Draft

Tattwa Ki Baat Day 2

तत्व की बात-3 गांधी भवन, दिल्ली विश्वविद्यालय १६ फरवरी१६८१ सहज-योग की तारीफ तो मैंने बहुत पर अगर बरसात आ जाए तो क्या आप कहिएगा खोलकर कर दी। लेकिन असलियत यह है कि कि इस छत्र-छाया ने ही आपको तकलीफ दे नहीं- यह तो जानने की बात है ! हमारे यहाँ भी अहंकार कुछ कम नहीं है विश्व में लेकिन बेकार आप बाहर चले गये पर सहज-योग में रहने से की चीज़ का हमें अहंकार हो जाता है और यह ये छत्र-छाया है, ये आपके ऊपर छाई हुई है, तो इस तरह कुछ बेकार की चीजें हैं कि उसके बारे ये वास्तव में ये छत्र-छाया का आपके ऊपर में हम लोग जानते हुए भी कि महाबेवकूफी है, हम उसे करते रहते हैं। सहज-योग जो है आपको है ? यह तो छत्र – छाया का उपकार है, परम सत्य के दर्शन कराता है। सत्य जो है, था और उपकार है। उसने आपको अपनाया और अपने रहेगा। उसके मामले में आप कोई (compro- अन्तरगत् रक्खा और आपकी छोटी-छोटी बातों mise) समझौता नहीं कर सकते कि आप कहें कि “चलिये, माँ ऐसा ही क्यों नहीं कह देते आप, जो काम बन जाए। इस तरह से बोल दीजिये तो उनमें से जैसे कि मैंने आपसे बताया था कि लक्ष्मी अच्छा रहेगा। इस तरह से कह दीजिये तो अच्छा जी का भी प्रसाद आपको मिलता है। और लक्ष्मी रहेगा।” ऐसी कोई बात सत्य नहीं है। जो है, सो जी का प्रसाद क्या होता है, यह भी मैंने आपको है, वो उसी तरह से रहना है। दी ? आपने ही अपनी छत्र-छाया मिटा दी और उपकार है या आपका उस छत्र-छाया पर उपकार का भी ख्याल रक्खा। सहज-योग में जो बहुत सी बातें होती हैं, बताया कि नाभि चक्र में श्री लक्ष्मीजी विराजती हैं, और अगर आप सत्य को नहीं मानना उनकी शक्ति विराजती है। और लक्ष्मीजी कैसी चाहोगे तो उसका आपको भोग उठाना पड़ेगा। हैं? इसका भी वर्णन मैंने आपको बताया था कि श्री माने ये नहीं कि सत्य आपको हानि देता है लेकिन लक्ष्मीजी जो हैं उनमें और पैसे वाले में महान अन्तर सत्य को अगर आप छोड़ दें तो असत्य पर उतर होता है । लक्ष्मीजी कमल पर खड़ी हैं उनके हाथ आये। और जब असत्य पर उतर आये तो असत्य में कमल है और एक हाथ देने वाला और एक हाथ तो हानिकारक है ही, वो आपको तकलीफ देगा। आश्रय में । कमल पर ये खड़ी हैं सो लक्ष्मीजी से लोग सहज-योग में देखने में तो काफी भारी-भरकम दिखाई देती हैं । आये, बहुत कुछ ऊँचे उठ गए; बड़ा उन्हें लाभ कभी आपने लक्ष्मीजी को एकदम ऐसा न देखा हुआ; बहुत कुछ पा लिया; बहुतों को पार किया; होगा जैसे कि आजकल की beauty queens होती ऐसा भी हुआ है कि बहुत उसके बाद उन्होंने सहज-योग छोड़ दिया। उसके हैं लेकिन उनकी तन्दरुस्ती काफी अच्छी है क्योंकि बाद आप एक साल बाद आये, “कि मां मुझे तो उनके अपने अन्दर बहुत कुछ ज्यादा पानी का बीमारी हो गई अब मैं क्या करूं ?” ऐसे भी बहुत समावेश है। उनका जन्म ही पानी से हुआ है न । से लोग “देखो जिसका जन्म पानी से हो, उसके अन्दर तो पानी होते हैं। तो कहने लगे कि सहज-योग ने हमें सज़ा दे दी।” ऐसे भी बहुत से बहुत होना पड़ता है। उसकी भी वजह होती है। लोग होते हैं। सहज-योग ने आपको सज़ा नहीं उसके अन्दर पानी न हो तो उनके अन्दर जो इतने दी लेकिन अगर आप किसी की छत्र- छाया में बैठे चक्र चलाने पड़ते हैं उसके लिए buffer (बफर). हैं और उसे छोड़कर आप बाहर जायें और आप उसके लिये रुकावट, उसके लिये एक बीच में

चैतन्य लहरी जनवरी फरवरी, 2005 46 बचाव और कुछ नहीं रह जाता इसलिये पानी शरीर (body) में होना बहुत जरूरी होता है और ज्यादा नखरे कर रहा है। जितना आदमी गरीब इस वजह से भारी-भरकम होती हैं। तो भी वो होगा, अपने देश में, उतने ही उसके कम नखरे कमल के ऊपर खड़ी हैं, माने उनकी तबियत से होंगे। लेकिन जितना आदमी रईस हो जायेगा इस कदर, शब्द नहीं हैं हिन्दी में-पर जिसे कहना उतने ही उसके नखरे ज्यादा हो गये और लक्ष्मीजी चाहिए कि इस कदर वो सधी हुई हैं कि तबियत से के कोई नखरे नहीं बेचारी के। वो तो कमल पर वो इस कदर सधी हुई हैं कि पूरा बैलेन्स अब भी खड़ी हुई हैं और पूरे समय खड़ी ही रहती (balance) करके और उनका कोई वजन ही नहीं हैं कभी यह भी नहीं कि मैं थक गई हूँ, मैं थोड़ी देर डालतीं वो, कमल पर कोई उनका वजन नहीं पर जितना भी ज्यादा रुपया होगा वो उतना ही | को लेट ही जाऊँ। कोई भी समय वो इस कमल पर अपने शरीर को सम्भाले हुए, इतने बड़े शरीर आप देख लीजिये लोग कितना बोझा दूसरों पर को सम्भाले हुए खड़ी रहती हैं, बिल्कुल हल्की सी । डालते हैं। अब जैसे कोई मेहमान आ गये आते किसी को महसूस ही नहीं होता है। यह असली ही साहब, हमारे खासकर सहजयोगी लोग भी लक्ष्मी तत्व की निशानी है । जिस आदमी में वास्तविक कभी कभी ऐसा काम करते हैं, यह खासियत लक्ष्मी है, उसका कहीं भी बोझा नहीं लगता। ऐसा आदमी जहाँ भी रहता है उसकी सुगन्ध, उसका जैसे कि आप कहीं से आये, अब देहली में सौरभ सब तरफ फैलता है लेकिन उसकी कोई भी डलता, कि अपना बोझा वो किसी पर नहीं डालतीं। 1 हिन्दुस्तानी सहजयोगियों की भी होती है। आ गये कोई सहजयोगी। तो वो पहले कहेंगे कि चीज़ महसूस नहीं होती। कहीं भी वो आपको नहीं साहब यहाँ कुछ आराम हमें नहीं मिल रहा और जताता है कि आप पैसे वाले हैं या आप पैसे वाले यहाँ पर हमें खाने को ठीक नहीं मिल रहा है। यहाँ नहीं हैं, या उसके पास ज्यादा पैसा है या आपके यह इन्तज़ाम ठीक नहीं है, यहाँ कोई इन्तज़ाम ठीक नहीं है जैसे अपने घर में तो ये लोग बिल्कुल रहता है कि किसी को पता ही नहीं चलता कि कैसे आलीशान बगीचों में ही रहते हैं। यहाँ आते ही अब आये और कैसे गये वो इस तरह से जीवन पास इस चीज़ की कमी है। वे तो इस तरह से सब उनको सब पता हो जाता है कि साहब यहाँ बिताता है कि जैसे किसी का पता ही नहीं चलता। की यह चीज़ ठीक नहीं है, यहाँ फलानी चीज़ लेकिन अधिकतर पैसे वाले तो पहले बीन बजा कर अच्छी नहीं है। कोई अगर बम्बई आये तो उनका घूमेंगे कि साहब मैं बड़ा पैसे वाला हूँ। कुछ नहीं तो भी यही हाल है। मतलब आप एक काटा बनकर रहते हैं, हर जगह की तरह आप फूल जैसे नहीं जिससे कि लोग मुड़ मुड़ कर देखें कि कौन गधा अजीब तरह का horm लेकर रास्ते में बजाते चलेंगे रहते, आप कॉटे की तरह हैं। हर आदमी को आप चुभते रहते हैं। हर आदमी को महसूस होना चाहिए कि आप आए हुए हैं, आप एक विशेष चीज़ एक एक तमाशा आदमी खड़ा कर देता है अपने हैं। आप कोई न कोई विशेष चीज़ हैं। इस तरह से हम लोग अपना जीवन जो है वो सोचते हैं कि बात नहीं, लक्ष्मी बहुत ज्यादा एकदम ऐसे तरीके से हमने बहुत महत्वपूर्ण कर लिया और जिस आदमी रहती हैं, सम्भली हुई , सधी हुई कि किसी को पता चला जा रहा है हर चीज़ का दिखावा (show) होना चाहिये। हर चीज़ की artificiality होनी चाहिये। नाम से क्योंकि वो पैसे वाला है। यह लक्ष्मीजी की

चैतन्य लहरी जनवरी फरवरी, 2005 47 ही न चले। एक हाथ से उनके दान होना चाहिये, नहीं हो सकता। अगर आप left को या right को वह दान भी किसी को पता नहीं होना चाहिये कि किसी भी अतिशयता पर चले जायें तो आपको दान हो रहा है। जैसे बह रहा है, जा रहा है, दे कैंसर (cancer) हो सकता है। इसलिये आपको रहा है, लेने का सवाल नहीं और दूसरे हाथ से बीचों बीच रहना है। आश्रय होना चाहिये जो उनके आश्रित हैं वो सब आशीर्वादित होने चाहियें, बजाय इसके कि बहुत से ने, हजारों लोगों ने सिगरेट पीना एकदम छोड़ मालिक अपने नौकरों को मारते हैं, पीटते हैं, यह दिया। इसी तरह से जिनका गुरुतत्व ठीक हो गया करते हैं-नहीं, आश्रित माने उनको पूरी तरह से उन्होंने शराब वगैरह एकदम छोड़ दिया। जो लक्ष्मी जी के आश्रित होते हैं उनको पूरी तरह अब जो विशुद्धि चक्र है उसकी विशेषता यह है कि से वरद हस्त होता है, पूरा वरदान होता है। और उनके दोनों हाथ में कमल होते हैं। मनुष्य बन गये तभी विशुद्धि चक्र पूरी तरह से कमल गुलाबी रंग के होते हैं और गुलाबी रंग के प्रादुर्भावित हुआ। इससे पहले इसका जो काम था कमल इस बात के द्योतक हैं के वो प्रेम की वो नहीं हुआ था और अब जो है 16 इसकी निशानी हैं गुलाबी रंग जो है वो उनके प्यार की कलाएं हैं। श्रीकृष्ण को 16 कला कहते हैं। और निशानी, प्रेम की निशानी; वो बिल्कुल ही नाजुकतम उसी तरह से 16 उसके subplexus हैं । जिसका पंखडियों में भंवरे जैसा काँटे वाला प्राणी होता है, विशुद्धि चक्र ठीक होगा उसका मुखड़ा सुन्दर उसे भी स्थान देती हैं; कहीं से भी चला आये उसे होगा, तेजस्वी होगा। उसकी आँखें तेजस्वी होंगी, सहजयोग में आने के बाद हजारों लोगों विशुद्धि चक्र, जब हमने गर्दन उठाई और जब हम पूरा रहने का इन्तज़ाम है। हर समय उसके लिये उसके नाक नक्श तेजस्वी होंगे और उसके अन्दर इन्तज़ाम रहता है। ऐसा आज तक मैंने तो कोई एक तरह का बहुत ही ज्यादा detached सा भाव पैसे वाला नहीं देखा कि उसके दरवाजे कोई चला होगा जैसे कि ड्रामा जैसा। उस आदमी के मुख पर आये और अच्छा भाई तुम्हें कोई जगह नहीं, आओ ऐसा लगेगा जैसे कि ड्रामा चल रहा है। एक पल मेरे घर सो जाओ। वो तो चार चार दरबान लगा में वो नाराज होगा और दूसरे ही पल में वो हंसता कर रखेगा कि कोई अच्छा भला भी आदमी हो तो रहेगा। बस उसकी अठखेलियाँ चलती रहेंगी। उसको पीट के, मार के भगा दें। जिसका विशुद्धि चक्र खराब हो जाता है इस प्रकार हमारे अन्दर जो लक्ष्मीजी का उसकी शक्ल खराब हो जाती है, पहली बात। तत्व है वो हमारे नाभि चक्र में है। इसके बारे में मैंने आपसे बता दिया। जैसा वो है वैसा ही है उस सी भयानक सी उसकी शक्ल दिखाई देने लगती अजीब सी विकृत सी शक्ल हो जाती है, अजीब | तत्व को हम बदल नहीं सकते। बाहर का आप सब है, कभी डरावना सा कभी डरा हुआ सा। अब हम कुछ बदल दीजिये लेकिन उसका तत्व जो है वही लोग इतने ड्रामे beauty-क्या क्या करते हैं न हम बना रहेगा। तत्व न बदल सकता है, न ही उसको लोग, उसके लिए धन्धे कोई करने की ज़रूरत आप बदल सकते हैं। नहीं। आप अपना विशुद्धि चक्र ठीक कर लीजिये सुषुम्ना पथ पर अगर आप रहें तो आपको आपकी शक्ल दुरुस्त हो जायेगी-बहुत शक्ल दुरुस्त कोई बीमारी नहीं हो सकती – विशेषकर कैंसर हो जायेगी और इसके अलावा जिसको विशुद्धि

चैतन्य लहरी जनवरी फरवरी, 2005 48 चक्र की पकड़ हो जाती है उस आदमी की आदमी अपनी पेशानी अपनी किसी गरज के लिये आवाज बहुत कर्कश या बिल्कुल धीमी या वो दूसरों के सामने झुकाता है या किसी भी नीच मधुरता का खो बैठता है। और दूसरी चीज़ यह है आदमी के सामने इसलिये झुकाता है कि उसे वो *कि हमारे अन्दर विशुद्धि -चक्र की जो left-side है, गुरु या और कुछ उसे मानता है तो उसकी right जिसे कि हम कह सकते हैं कि हमारे चक्र के left- विशुद्धि पकड़ जाती है और right विशुद्धि पकड़ने side में विराजती है वो विष्णु-माया है, माने श्री के नाते बहुत तरह के complications होते हैं | कृष्ण की बहन जो विष्णु-माया थी। अब जब विशेषकर कि cancer की बीमारी इसमें हो सकती हमारे भाई-बहन के रिश्ते खराब हो जाते हैं किसी है। क्योंकि जो लोग चापलूसी में जाकर इसके पैर भी माने में, तो यह चक्र खराब हो जाता है। जब छ रहे हैं उसके पैर छ रहे हैं , उसके ये कर रहे भाई बहनों की कद्र नहीं करता , अपनी बहनों को हैं, करते हैं, जान लें कि आखिर आपको परमात्मा सताता है, तो भी चक्र खराब हो जाता है। लेकिन के सिवाय और किसी के सामने अपना सिर नहीं जब संसार में हम हर औरत की ओर गंदी नज़र झुकाना है। और किसी के सामने सर झुकाने की से देखते हैं और हमारे अन्दर यह विचार नहीं रह जरूरत भी क्या है, वह दे भी क्या सकता है ? बहुत जाता है कि यह हमारी बहन है तब यह चक्र बहुत से लोग हमें कहते हैं कि वो सन्त-साधु थे हमने ही बुरी तरह से खराब हो जाता है। और जब left माथा उनके सामने झुकाया। अधिकतर तो ढोंगी विशुद्धि खराब हो जाती है तब आदमी को यह और भोंदू लोग हैं, नहीं तो 420, या दानव और लगता है कि मैंने बड़ी गलती करी, अन्दर से यह राक्षस ही हैं अच्छा अगर यह नहीं हुए तो समझ लगता रहता है और वो एक तरह guilty आदमी हो लीजिए एक साधु-सन्त है, वो पार भी है, समझ जाता है। कभी-कभी यह guilt इतना बढ़ जाता है लीजिए, तो भी इन्सान है, भगवान तो नहीं है। कि उसमें से अनेक पाप होने लग जाते हैं। अवतार तो नहीं है। जब तक कोई अवतार नहीं हो भी complex उसके अन्दर आ जाता है। इसलिये तो अपना सर झुकाने की क्या ज़रूरत है। तुम सहज-योग में इसका मन्त्र है, अंग्रेजी में तो कहते कल हो सकते हो पार, हैं “I am not guilty” और हिन्दी में कहते हैं “कि सकते हो। लेकिन जो अवतार है उसके सामने सर माँ हमने कोई गलती नहीं करी जो तुम माफ नहीं झूुकाना दूसरी बात है क्योंकि उसके सामने सारे करो। right side की जो विशुद्धि है ये चक्र खुलते हैं। सिर्फ अवतार के सामने ही सर विट्ठल-रुकमणी वाले कृष्ण, जब कि कृष्ण राज्य झुकाना चाहिए। यह दूसरी बात है कि अपने माँ कर रहे थे तब। जब हम अपने राज्य में विराजते बाप हैं उनके सामने सर झुकाओ, वो तो एक हैं, माने हमारा राज्य परमात्मा का राज्य हुआ, और रोजमर्रा का एक व्यवहार है उसकी बात दूसरी है। जब परमात्मा के राज्य में हम विराजे हुए हैं और शादी में गये, माँ बाप के पैर छु लिए, बड़ों के पैर तब भी हम भिखारी जैसे बक बक करते हैं, और लिए, ये बात दूसरी है। एक बार वो कर लिया वो लोगों से रुपया माँगते हैं, पैसे माँगते हैं और उनकी तो सम्मत है। चापलूसी करते हैं और उनके सामने अपनी पेशानी झुकाते हैं तब right विशुद्धि पकड़ जाती है। जो रहे हैं महाशय जी उधर से, और कहा कि साहब और तुम भी कल सन्त हो छू लेकिन हर बार जिसको देखिए वो चले आ

चैतन्य लहरी जनवरी फरवरी, 2005 49 यह तो minister साहब के यहाँ बिल्कुल उनके आपकी left विशुद्धि पकड़ती है और इस left विशुद्धि चमचे हैं चले चार और चमचे उनके पीछे उनके पैर का इलाज यही है कि उस मन्त्र को जो है जागृत कराना। अगर कोई मन्त्र जागृत नहीं है तो उसे होती है वो इस कदर दुख में पड़ जाते हैं और रटना ही नहीं है। और मन्त्र जागृत तभी होता है इतनी तकलीफें उठाते हैं कि मैं उन लोगों को जब कोई realised soul आपको मन्त्र बताये और ठीक करते करते तंग आ गई क्योंकि मनुष्य को वो भी निदान कर बताये कि आपको कहाँ तकलीफ अपनी इज्जत और अपनी शान का पता नहीं। ये है, कौन सी तकलीफ है, किस जगह कौन सा मन्त्र चक्र जो है इसने आपको शान दी जिसने आपके कहना है। अगर वो बराबर आपको यह बता सके सर को ऊपर उठाया। यों नहीं दी के इसको आप तो आप उस मन्त्र को कहें तो आपको मन्त्र सिद्धि हर जगह झुकाते फिरें और अपने को नीचे गिराते हो सकती है। सहज-योग में आज ऐसे हज़ारों फिरें। आप बहुत बड़ी चीज़ हैं। भगवान ने आपको लोग हैं जिन्होंने मन्त्र को सिद्ध कर लिया है। इतने एक अमीबा से इन्सान बनाया और जब आप इस मन्त्र सिद्ध हैं उनके कि वो अगर अपनी जगह में हालत में आ गए तो आपको जरूरी है कि आप भी बैठकर मन्त्र कह दें तो उससे जो काम करना इसकी इज्ज़त करें, अपनी इज्ज़त करें और अपनी है करा सकते हैं। मतलब है बुरा काम तो सहजयोग जो शान है उसको समझें। दूसरी बात यह है कि में कोई कर ही नहीं सकता लेकिन अच्छे कर बहुत से लोगों का यह भी है कि दूसरों से डरते सकते हैं। ऐसे ऐसे लोग पहुँच गये हैं सहजयोग में, रहते हैं। यह भी चक्र है इससे left विशुद्धि पकड़ दिल्ली में नहीं हैं इतने, दिल्ली में कोई लोग बहुत जाती है। जब आप किसी आदमी से डर जाएं; पहुँचे हैं, लेकिन इतने ज़्यादा लोग नहीं हैं। बाकी ऐसे बहुत से लोग जिन्होंने मन्त्रों को एकदम सिद्ध कर लिया है और सिद्धता के लिए मन्त्र पर मेहनत विशुद्धि चक्र बहुत महत्वपूर्ण है और विशुद्धि करनी पड़ती है। बैठ कर मेहनत करनी पड़ती है, चक्र के पकड़ने से अनेक तरह की बीमारियाँ आती उस पर बोलना पड़ता है, अपने चक्रों पर ध्यान हैं। सबसे खराब बात यह है कि जब आप पार भी करना पड़ता है और उसकी सिद्धता हासिल हो हो जाते हैं तो भी आपको vibrations नहीं आते। जाती है। अगर किसी ने गणेश का मन्त्र सिद्ध कर नहीं हो पाता। आपकी जितनी लिया है तो वो आदमी इतने कमाल कर सकता है छूने के लिए। इस तरह की जिन लोगों की दशा 1. 1 वास्तव में आप बेकार ही में डर रहे हैं तब आपकी left विशुद्धि पकड़ सकती है। आपको महसूस nerves हैं हाथ की मर जाती हैं तो हाथ पर कि कोई हद नहीं। लेकिन अभी तक सहजयोग में आपको महसूस नहीं होता। और लोग कहते हैं कि ऐसे बहुत थोड़े लोग हैं कि जो इस ओर ध्यान देते माँ हमको अन्दर तो महसूस हो रहा है पर हाथ पर हैं। और जिन्होंने भी ध्यान दिया, ऐसे मैंने बहुत से महसूस नहीं होता और इसलिए उनको परेशानी लोग देखे हैं जिन्होंने मन्त्र को इतनी जल्दी सिद्ध कर लिया है कि मुझे आश्चर्य होता है। उनके एक यह है। अगर आपने गलत मन्त्र कहे हैं, आपने ही मन्त्र से कितना बड़ा कार्य हो जाता है। इसलिए किसी ऐसे आदमी से मन्त्र लिया है जो अनाधिकार मैं आपसे कहती हूँ कि अपने विशुद्धि चक्र को आप है, जिसने आपको झूठे मन्त्र दिये हैं, इस सबसे स्वच्छ रखें। विशुद्धि चक्र जो है यह विराट है। हो भी जाती है । सबसे बड़ी खराबी विशुद्धि की

चैतन्य लहरी जनवरी – फरवरी, 2005 50 कृष्ण विराट-स्वरूप हैं। अन्त में कृष्ण विराट हो बीचों-बीच में रहना चाहिये। जाते हैं। सारा जो evolution (उत्क्रान्ति) है ये सिर्फ विष्णु शक्ति से होता है तो विष्णु बनते बनते अनेक तरीके हैं क्योंकि सोलह उसकी कुल कलाएं आखिर विराट हो जाते हैं। विराट का स्थान ये है, हैं और सोलह हजार इसकी शक्तियाँ हैं जो कृष्ण ये विराट का स्थान है। इसी से विशुद्धि चक्र को के साथ उनकी पत्नियाँ बनकर उनके समय में रही ठीक करने के लिए ये पेशानी आप किसी के सामने थी। यदि कोई कृष्ण के ऊपर कहे, वो इस तरह के मत झुकाइये। ये विराट के सामने ही झुकनी आदमी थे तो बड़ा आश्चर्य होता है क्योंकि वो चाहिये क्योंकि आप विराट के अंग प्रत्यंग हो गये योगेश्वरों के योगेश्वर थे उनको समझने के लिए हैं। अब आप पार हो गये। अब खबरदार, अगर जो आपको बहुत कुछ अधिक सीखना पड़ेगा । वो स्वयं आपने अपनी पेशानी किसी के सामने झुकाई। साक्षात् योगेश्वर थे ये उनकी 16000 शक्तियाँ थीं अगर आपने किसी के सामने झुकाई है तो आप जिनको उन्होंने जन्म दिया था इस संसार में और विराट को भूल गये मोहम्मद साहब ने बहुत बड़ा फिर उनको ही उन्होंने कैद करवाया और फिर मन्त्र विराट का कहा है “अल्लाह हो अकबर” और उनसे विवाह किया क्योंकि उनके पास सहजयोगी ये मन्त्र जो मोहम्मद साहब ने (वो साक्षात् दत्तात्रेय तो थे नहीं तो उन्होंने सोचा कि ठीक है मैं अपनी थे) और उन्होंने ये मन्त्र कहा है कि आप “अल्लाह शक्तियों को ही साकार स्वरूप में संसार में भेजता हो अकबर” कहो। अकबर माने great, माने विराट । हूँ और उन्होंने जो सबसे बड़ा कार्य किया है कि ये जो उंगली विशुद्धि की है, दोनों उंगली कान में उन्होंने इसे पूरी तरह से बीज को फैलाया और विशुद्धि चक्र के अनेक दोष हैं । उसके डाल कर ऊपर पीछे की तरफ गरदन कर के ईसा मसीह ने बाद में आज्ञा चक्र में आकर कहा कि अल्लाह हो अकबर ” कहें तो आपका विशुद्धि चक्र कुछ बीज इधर पड़ गये, कोई बीज उधर पड़ गये, खुल जाता है। इसके अलावा और बहुत आदि हैं। इसके मामले मे मैं आपको बता नहीं बाप की बात करते हैं तो वे दूसरा तीसरा कोई नहीं सकती आज, लेकिन अनेक तरीके से यह ठीक हो है, वो कृष्ण ही हैं। कृष्ण ही उनके पिता हैं। जब सकता है और उसको ठीक रखना चाहिये। सबसे भी ईसा मसीह की उंगलिया देखिये तो ये दो बड़ी बात है कि आपकी जबान से कोई सी भी उंगलियां हैं। यह उंगली विष्णु की है, यह उंगली कड़वी बात किसी से कहनी नहीं चाहिये और कृष्ण की है। हमेशा उन्होंने अपने बाप की बात की किसी की भी चापलूसी करने की जरूरत नहीं है। इसके लिये आप अगर पढ़ते हों तो देवी-भागवत् और अगर कोई सहजयोग को नहीं मानता तो पढ़ें। इसमें महा विष्णु का वर्णन है जो राधाजी का साफ कह देना चाहिये कि रहने दीजिये ” से आसन कोई बीज इधर पड़ गया। जब ईसा मसीह अपने यह पुत्र बनाया हुआ था और बिल्कुल वही चीज़ ईसा आपके बस का नहीं, छोड़िये ।” न ही किसी के मसीह हैं । उनके दो हिस्से थे। एक हिस्सा श्री सामने चापलूसी करने को जरूरत है, न ही किसी गणेश और एक ईसा-मसीह, आगे चलकर के एका के सामने घिघियाने की जरूरत है और न ही दश-रूद्र में यही जो बड़ी भारी शक्ति है वो उनकी किसी से कठिन बात करने की जरूरत है । मानते शक्ति है इसीलिये वो मरे नहीं उनका resurrection हैं तो ठीक है वरना छोड़ दीजिये बस काम खत्म । (पुनरुत्थान) हो गया वे साक्षात् प्रणव हैं जो कि

चैतन्य लहरी जनवरी फरवरी, 2005 51 संसार में आया और इस संसार से उठकर चला हे ! हमारे अपराधों को क्षमा करो।” यही मन्त्र प्रभु गया। यह साक्षात् गणेश था जो इस संसार में आज्ञा चक्र का है, आपको आश्चर्य होगा और आया और इसीलिए उसको कोई चीज़ मार नहीं बहुत बार मैं आपसे कहती हूँ कि ” माफ कर दो, सकी। यह एक ही अवतार ऐसा परमात्मा ने भेजा माफ कर दो, माफ कर दो” क्योंकि आपका आज्ञा था जो साक्षात् प्रणव’ मात्र था। इनका क्रास पर चढ़ाना, जो है वो इसलिये हुआ था कि आज्ञा चक्र के बीच इनका स्थान है जहाँ पर पिट्च्यूटरी (pi- को उनको खोलना था, आज्ञा चक्र को। जब चक्र पकड़ा है। अहंकार और प्रति-अहंकार दोनों tuitary) और पीनीयल (pineal body) बाडी भी मनुष्य ने अपनी बेवकूफी से उनको क्रास पर चढ़ा दोनों को सम्भालती है, इनके बीचों-बीच एक बहुत दिया तब मानो जैसे कि उन्होंने सबके लिये अपने सूक्ष्म स्थान आज्ञा का है और यह दोनों इस पर को उस आज्ञा-चक्र से निकाल दिया और उनका काम करते हैं। शुरुआत तो दोनों की विशुद्धि चक्र जो सन्देश है वो क्रास नहीं है। उनका सन्देश जो से होती है पर इनका चलन-वलन और सम्भालना है पुनरोत्थान है। उन्होंने उसमें से पुनरुत्थान और ( steering) स्टीयरिंग जो है वो आज्ञा चक्र से करके दिखाया। उन्होंने मर करके जी कर दिखाया होता है जिस पर साक्षत महागणेश और महाभैरव वही सहज-योग है कि जिसमें आपका भी जो बैठे हुए हैं और जो सामने की तरफ यहाँ , ये जो conception है वो immaculate है यानि आप भी माँ के हरदय गर्भ में आप आते हैं और वहाँ से स्थान है। ईसा-मसीह महा विष्णु हैं और उनके माँ आपको ब्रह्मरन्ध्र से पैदा करती है आप जो लिये कृष्ण ने कहा था कि मुझे जो-जो चीज़ पहले हैं वो मर जाते हैं और एक नये हो जाते हैं। संसार में अर्पण करेंगे उसमें से सोलहवां हिस्सा ईसा मसीह ने यह सबसे पहले, उन्होंने करके रहेगा और तुम सारे संसार का आधार बन दिखाया था। वो सबसे बड़ा बेटा मॉँ का था और वो आपका सबसे बड़ा भाई है जिसने यह सबसे रहेगा। हालांकि श्री कृष्ण का स्थान यह है विराट पहले इतना बड़ा काम करके दिखाया। और का, लेकिन यहाँ पर बीच में आज्ञा चक्र में दोनों आज उसी बूते पर आप लोग पार हो रहे हैं। जो जगह विशुद्धि और विराट के बीचों-बीच में उन्होंने भी incarnations (अवतार ) आते हैं वो अगवाई करते हैं। एक step forward जो होता है , वो वही मेरी थीं। राधाजी जो थीं वो ही संसार में मेरी अगवाई करते हैं और उन्होंने यह बड़ा भारी महान (Mary) के रूप में आई थीं और वो ही इस बेटे को कार्य किया था। और आज्ञा चक्र पर जो आदमी लाई। यह सारा खेल और नाटक इसलिये किया आज्ञा चक्र के, ये जो है यहाँ पर ईसा-मसीह का तुम्हारा कर आओगे और मेरे से भी ऊपर तुम्हारा स्थान अपने बेटे को बैठाया है और राधाजी उनकी माँ थीं, पार हो गया है वो जानता है कि हमारा मन्त्र उस गया कि मनुष्य अपनी मूर्खता को समझ ले कि अहंकार में अपने ego में उन्होंने ईसा-मसीह जैसे पर सहज-योग में Lord’s prayer है। Lord’s prayer से आज्ञा चक्र एकदम छूट जाता है। आदमी को, जोकि साक्षात् ब्रह्मस्वरूप थे, उनको जोकि उसमें कहा है कि” जैसे कि हम अपने तक पहचाना नहीं। लेकिन अब ऐसा नहीं हो अपराधों को क्षमा करते हैं, अपराध जिन्होंने हमारे खिलाफ किये हैं उनको क्षमा करते है; उसी प्रकार सकता। ईसा-मसीह ने कहा है ” कि मेरे खिलाफ

चैतन्य लहरी जनवरी फरवरी, 2005 52 चाहे आपने कुछ भी कहा हो उसकी मैं माफी first residence in the little Surrey Hills, और करता हूँ और मेरे साथ आपने कोई भी ज्यादती की यहाँ तक लिखा है कि उनके जो प्यार के Vi- है उसके लिए मैं माफी देता हूँ लेकिन अगर Holy brations (वाईब्रेशन) हैं जो स्नायु हैं वो ईश्वर की Ghost माने आदिशक्ति के खिलाफ अगर किसी ने तरह हर जगह, हर एक समय विद्यमान हैं। और जरा सा भी कदम उठाया तो उसको मैं देख इतनी बारीक चीज सहज-योग की लिखी है और लगा।”साफ-साफ शब्दों में कहा है। punishment जो है वो बहुत गहरा होगा। साफ-साफ उन्होंने इन शब्दों में कह दिया कि यानि पार हो जायेंगे ये भगवान के लोग है (Men अगर आप बाइबल (Bible) पढ़े तो आप देख लें। of God) जो पार हो जायेंगे और एक विशेष बात इसका मतलब उन्होंने कह दिया कि Holy Ghost होगी कि ये लोग जो पार होगें वो दूसरों को भी (आदिशक्ति) संसार में आने वाले हैं और prophets बनाएगें इसका सारा वर्णन उन्होंने दे Holy Ghost से ठण्डी हवा आयेगी,Cool breeze दिया है। इसी तरह से Bible में भी John के आयेगी, यह भी बाइबल में लिखा है। इसलिये Revelations में सहज-योग के बारे में सब कुछ ईसाई लोग मुझे जरा ( मतलब हिन्दुस्तान के नहीं लिखा हुआ है। जो समझने वाले हैं वो उसे पार लेकिन बाहर के) मुझे बहुत जल्दी मान जाते हैं होने के बाद समझ सकते हैं इसी तरह की क्योंकि यह पहचान है Holy Ghost की। यह भविष्यवाणियाँ हर एक जगह हुई हैं। जो समझदार आदि-शक्ति की पहचान है। और किसी से भी लोग हैं वो सब कुछ समझते हैं लेकिन जो समझदार ऐसी ठंडी हवा नहीं आती है जैसी Holy Ghost से नहीं हैं उनके लिए काला अक्षर भैंस के सामने क्या आती है, जैसे कि लिखा हुआ है। उसका सबसे बड़ी बात जो उन्होंने लिखी है वो यह कि सहज -योग में लोग prophets होएंगे यानि प्रेषित होता है वैसी ही बात है। इसी तरह की चीज़ है कि पर सबसे तो आश्चर्य है वहाँ एक विलियम आदमी को समझाने के लिए ही पार कराना पड़ता ब्लेक (William Blake) नाम का आदमी जोकि है। बहुत बड़ा कवि सौ साल पहले हो चुका है, उसने यहाँ तक लिख दिया है कि हमारा आश्रम कहाँ आप भी इस बात को नहीं समझ सकते। इसलिए जब तक आपके अन्दर प्रकाश नहीं आएगा, रहेगा। Lambethvale (लेम्बैथवेल) में आश्रम रहेगा आप पहले पार हो जाइये। फिर आप समझेंगे और जहाँ ruins (खंडहरों) में foundations (नींव) पूरी बात को आप जानेंगे। पार हुए बगैर कोई भी पडेंगे, जो सही बात है। और जब पहले पहल जब मैं London गई थी, तो तब जहाँ Surrey hills (time ) हो गया है, अब आप पार हो जाइये। (सरे-हिल) में मैं रहती थी, वह भी लिखा है कि बात करना व्यर्थ जाएगा। अच्छा, अब बहुत समय अनन्त आशीर्वाद (निर्मल योग)

University of Delhi, New Delhi (India)

Loading map...